जैसे ही भारत ने नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों को बुलाकर अगले चरण के समन्वय हेतु मंच तैयार किया, वहीँ पश्चिम एशिया के जटिल विभाजन और तनाव इस प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैठक के ऊपर बड़ी छाया बना रहे थे। यूरोपीय और अमेरिकी रिपोर्टों के अनुसार, इरान-यूएई विवाद, हॉरमेज जलडमरूमध्य में बढ़ती नौसैनिक सुरक्षा चिंताएं और खाड़ी देशों के बीच असहमति ने इस समिट की चर्चा को अत्यधिक संवेदनशील बना दिया है। इरान ने यूएई को प्रतिबद्धता की कमी के लिए आलोचना की, जबकि भारत ने अपने समुद्री मार्गों को खोलने के लिए इरान को अधिक भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा। इस संदर्भ में, इरानी विदेश मंत्री ने बताया कि इरान 'हॉर्मुज प्रोटोकॉल' तैयार कर रहा है, जिससे जलडमरूमध्य में आने वाले खर्चों और सुरक्षा मुद्दों को साझा किया जा सके, जिससे इस क्षेत्र में शांति और व्यापार दोनों को बढ़ावा मिल सके। समिट में इराक के इरानी प्रतिनिधि अब्बास अरघची की भी उपस्थिति रही, जो खाड़ी में चल रहे तनावों के बीच भारत और इरान के बीच कूटनीतिक पुल बनाते हुए एक प्रमुख भूमिका निभा रहे थे। इरान ने भारत की वार्तालाप में हथियारबंद संघर्ष को समाप्त करने की पहल का स्वागत किया और कहा कि यह कदम मध्य पूर्व में स्थिरता लाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। वहीं, इरान की आलोचना के बावजूद, कई पश्चिमी विश्लेषकों ने कहा कि ब्रिक्स देशों की इस बैठक में आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के साथ-साथ भू-राजनीतिक संतुलन को समायोजित करने का प्रयास भी देखा जा रहा है। भारत के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने इस मुलाकात को 'विश्व में बहुपक्षीयता के पुनरुद्धार' के रूप में वर्णित किया और कहा कि ब्रिक्स सदस्यों को अलग-अलग क्षेत्रों में उठते तनावों को संभालते हुए एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली इस समिट के माध्यम से न केवल आर्थिक साझेदारी को सुदृढ़ करना चाहती है, बल्कि क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को भी बढ़ावा देना चाहती है। इरान ने भारत की इस पहल को सराहा और कहा कि जलडमरूमध्य के आसपास की सुरक्षा को लेकर संयुक्त प्रोटोकॉल विकसित करना दो देशों के बीच विश्वास को और गहरा करेगा। इस समिट के दौरान, कई प्रमुख मुद्दों पर गहरी चर्चा हुई, जिसमें यूएई-इरान के बीच सुदूरसंवेदनशील मुद्दों का समाधान, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक सुरक्षा, तथा भारतीय समुद्री व्यापार के विस्तार के उपाय शामिल थे। इरान ने यह भी कहा कि वह भारतीय जहाज़ों को अधिक स्वतंत्रता देगा, जिससे दोपनियों के बीच व्यापारिक मार्ग सुगम हो सकेगा। साथ ही, ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों ने भी इस पर अपने विचार रखे और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के मद्देनज़र सहयोग को आगे बढ़ाने की बात की। अंत में, दिल्ली में आयोजित इस ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की मुलाकात ने दर्शाया कि पश्चिम एशिया के जटिल विभाजन के बावजूद, देशों को आर्थिक सहयोग और शांति के लक्षणों को साकार करने के लिये संवाद को जारी रखना आवश्यक है। इरान-यूएई का समझौता अभी अधुरा है, परंतु भारत के मध्यस्थता प्रयास और हॉर्मुज प्रोटोकॉल का प्रस्ताव इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस प्रकार, नई दिल्ली ने इस समिट को न केवल आर्थिक मंच, बल्कि मध्य पूर्व में स्थिरता और सहयोग का सामाजिक-राजनीतिक पुल बनाते हुए देखा, जिससे भविष्य में ब्रिक्स के साथ साथ क्षेत्रीय साझेदारी और भी मजबूत होगी।