नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) पर धूम मचा दी है जब हाल ही में NEET UG 2026 की प्रश्न पत्रिका का लीक होना सामने आया। इस घोटाले को लेकर ऑनलाइन शिक्षा मंच पर मशहूर शिक्षक खान सर ने खुलीआम तौर पर एनटीए को ‘खेलते‑खेलते छात्रों के जीवन का अपमान’ करने वाला कहा और कठोर कार्रवाई की मांग की। उनका यह बयान राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी प्रतिक्रिया लेकर आया है, क्योंकि हर साल लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा के माध्यम से अपने भविष्य का मार्ग तय करते हैं। लीक की जानकारी मिलते ही सोशल मीडिया पर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने इस बात को लेकर काफ़ी रोष व्यक्त किया, जबकि एनटीए ने अभी तक इस पर स्पष्ट उत्तर नहीं दिया है। लिंक की गई कई खबरों में बताया गया है कि यह लीक केवल एक प्रदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई राज्यों में संभावित प्रतिभागियों तक पहुँचा। परिणामस्वरूप छात्रों के मन में अनिश्चय और भय की स्थिति बन गई है, क्योंकि एक बार प्रश्नपत्र लीक हो जाने पर परीक्षा की वैधता पर सवाल उठता है। कुछ छात्र इस बात का आरोप लगा रहे हैं कि लीक के पीछे कुछ संस्थागत गिरावटें और सुरक्षा मानकों की कमी है, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति हो सकती है। इस बीच, एनटीए ने कहा है कि वे इस मामले की पूरी जांच कर रहे हैं और दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा देंगे, परन्तु छात्रों की आशंका अभी भी बनी हुई है। क्लासरूम में खान सर के इस बयान ने कई युवा मनों में नई उमंग जगा दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जब तक परीक्षा का कागज़ सुरक्षित नहीं रहेगा, तब तक छात्रों का भविष्य सुरक्षित नहीं माना जा सकता। हमें जवाबदेह लोगों को कड़ी सज़ा दिलवानी होगी।” इसके बाद कई सामाजिक संगठनों और छात्र परिषदों ने भी एनटीए के खिलाफ तुलनात्मक रिपोर्टें पेश की हैं और मांग की है कि परीक्षा प्रक्रिया में पूरी तरह से पारदर्शिता लाई जाए। कुछ राज्य सरकारों ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, अपने छात्रों को आश्वस्त करने के लिए वैकल्पिक योजना तैयार करने की घोषणा की है। इस घटना ने शिक्षा नीति में एक गहरा प्रश्न उठाया हैः क्या मौजूदा राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा प्रणाली ही इस तरह के जोख़िम को सहन कर सकती है? कई विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि मेडिकल सीटों के आवंटन में राज्य सरकारों को अधिक अधिकार देना चाहिए, जिससे प्रत्येक राज्य की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रवेश प्रक्रिया को सुरक्षित किया जा सके। किन्तु इस दिशा में बदलाव के लिए केंद्र सरकार की स्पष्ट नीति और समय पर कार्यवाही आवश्यक है।