राष्ट्रपति के अनुच्छेद 192 के तहत लागू किए गए प्रत्याख्यान विरोधी नियम का उद्देश्य विधायी संस्था में स्थिरता बनाये रखना और दलीय विचलन को रोकना है। तमिलनाडु की प्रमुख पार्टी एआईएडीएमके में वर्तमान संकट ने इस कानून को फिर से सुर्खियों में खड़ा कर दिया है। कई विधायक और वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री विजय समन्त के समर्थन में मतदान करने के बाद पार्टी के आदेशों के विरुद्ध खुलेआम विरोध कर रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर बड़े पैमाने पर इस्तीफे और पदों से हटाए जाने की लहर दौड़ गई है। एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता ई.पी. सिंह ने कई विद्रोही नेताओं को उनके सभी पदों से बर्खास्त कर दिया, जबकि पार्टी प्रमुख पालनीस्वामी ने 25 विधायकों को हटाने का कदम उठाया। इस पर सवाल उठता है कि प्रत्याख्यान विरोधी विधेयक (Anti‑Defection Law) इस स्थिति में कैसे लागू होगा और किस हद तक यह विधायकों को पार्टी के अनुशासन में बांध सकता है।