📰 Kotputli News
Breaking News: अयोध्या में राम मंदिर निधि घोटाले की जाँच: संगParivar के ही दो विरोधी दलों के बीच दर्ज तनाव
🕒 1 hour ago

अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए जुटाई गई लाखों की दानराशि के प्रबंधन को लेकर तनाव तीव्र हो गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) स्थापित की, जिसके बाद निधि में से कुछ रकम के गायब होने की खबरें सामने आईं। इस मामले में पहले तो राष्ट्रीय मामलों के बीच एक बड़ा विवाद पैदा हो गया था, पर अब यह विवाद स्वयं संगठित परिवार के भीतर ही दो प्रमुख गुटों को आपस में भिड़ा रहा है। जांच टीम ने प्रारंभिक रिपोर्ट में संकेत दिया है कि निधि के कुछ हिस्से को अनुचित तरीके से अनुबंधित कंपनियों को दी गई था और कई भुगतान में पर्याप्त दस्तावेज़ी साक्ष्य नहीं मिल पाए। इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को धार्मिक भावनाओं की अपमानजनक बात कहा, जबकि केंद्रीय सरकार के एक उच्च अधिकारी ने इसे "खुली लूट" कह कर निरंकुशता की निंदा की। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोपों की बौछार की, जिससे जनता के बीच भ्रम और असंतोष की भावना बढ़ी है। भाजपा के अंदर भी इस घोटाले ने गहरी विभाजन को उजागर किया है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि दानराशि का सही उपयोग होना चाहिए और जाँच में वैधता की जाँच की जानी चाहिए, जबकि कुछ अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ता इस मुद्दे को राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं, खासकर उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों के संदर्भ में। इस दलिल से ऐसा प्रतीत होता है कि राम मंदिर की कथा को राजनीतिक हथियार में बदलने की कोशिश की जा रही है। जनता के बीच इस मामला को लेकर कई सवाल उठे हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इतनी बड़ी राशि के प्रबंधन में किन-किन प्रक्रियाओं की अनदेखी हुई और निधि के प्रवाह को कैसे ट्रैक किया गया। साथ ही, दान देने वाले धार्मिक संस्थानों और व्यक्तिगत दाताओं की आशा भी इस घोटाले से ध्वस्त हुई है, जो भविष्य में ऐसे बड़े धार्मिक प्रोजेक्ट्स में योगदान करने के इच्छुक लोगों को हतोत्साहित कर सकता है। निष्कर्षतः, अयोध्या राम मंदिर निधि घोटाला न केवल वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि एक ही संगठन के भीतर भी वैर और सत्ता के संघर्ष कितने गहराई तक पहुँच सकते हैं। इस स्थिति का समाधान तभी संभव होगा जब सभी पक्ष पारदर्शिता को अपनाएँ, जाँच प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष रहे, और निधि के वास्तविक उपयोग को सार्वजनिक रूप से प्रमाणित किया जाए। तभी अयोध्या के पवित्र भूमि पर निर्माण कार्य बिना विवाद के आगे बढ़ेगा और जनता का विश्वास पुनः स्थापित हो सकेगा।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 23 Jun 2026