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Breaking News: ममता कैंप का संघर्ष गहराता, विशेष नेतृत्व सूची ईसी को भेजी गई
🕒 1 hour ago

कैलकत्ता में आज टीएमसी (ट्रॉफीक पार्टी) के आंतरिक शक्ति संघर्ष ने एक नया मोड़ ले लिया है। ममता बनर्जी की समर्थकों की टीम ने चुनाव आयोग (ईसी) को एक विस्तृत नेतृत्व सूची आधिकारिक रूप से प्रस्तुत कर दी है, जबकि पार्टी के भीतर असंतुष्ट कैडर अपने कदमों को तेज़ी से बढ़ा रहे हैं। यह कदम तब आया है, जब कई प्रमुख टीएमसी विधायक और कार्यकर्ता पार्टी से निकाले जाने की धमकी का सामना कर रहे थे और उनके आगे बगावती की संभावना बन गई थी। इस सूची में कई वरिष्ठ सदस्यों के नाम शामिल हैं, जिन्हें ममता बनर्जी ने संभावित आगामी चुनावी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए नामित किया है। इसी बीच, ममता बनर्जी ने मध्यस्थता का संकेत देते हुए मदन मित्रा को प्रमुख व्हिप (मुख्य दल प्रमुख) बनाए रखने की बात कही, जबकि विधानसभा के स्पीकर ने इस मुद्दे को अभी-अभी अधीनस्थ (सुब ज्यूडिस) घोषित कर दिया। इस पर कई राजनैतिक विश्लेषकों ने कहा कि यह कदम पार्टी के भीतर उत्पन्न असमानताओं को सुलझाने की दिशा में पहला कदम हो सकता है, परन्तु इस प्रकार की कार्रवाई से असंतुष्ट आकांक्षी नेताओं को और अधिक हतोत्साहित नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में देरी ने भी इस स्थिति को और जटिल बना दिया है। अदालत की लंबी सुनवाई के कारण कई बागी टीएमसी विधायक अब अधिक साहस से अपने विरोध को व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता के आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती दी है। इस बीच, टीएमसी ने आठ प्रमुख नेताओं को बर्खास्त कर दिया, जिनमें फिर्हाद हाकिम और अरूपBiswas जैसे नाम शामिल हैं, जिन्हें 'एंटी-पार्टी एक्टिविटीज' के कारण बर्खास्त किया गया। यह कदम पार्टी के भीतर अनुशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया, परन्तु इससे विरोधी विचारधारा वाले समूहों की संख्या में वृद्धि की आशंका भी जताई जा रही है। डेली पायनियर और एनडीटीवी के अनुसार, ममता बनर्जी ने 'रिमूव्ड बाय रेबेल्स' को चुनौती देते हुए चुनाव पैनल को बताया कि वह अभी भी सर्वोच्च नेता हैं और पार्टी के सभी फैसलों पर उनका अंतिम अधिकार है। इस बयान ने पार्टी के भीतर और बाहर दोनों ही तरफ़ से विभिन्न प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न की हैं। कुछ ने इसे दृढ़ नेतृत्व का संकेत माना जबकि अन्य इसे आशावाद की बजाय निराशा का स्रोत समझते हैं। इन सभी घटनाओं को देखते हुए स्पष्ट है कि टीएमसी का भविष्य कई जटिल सवालों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। नेतृत्व सूची के माध्यम से ममता बनर्जी ने अपने पक्ष में बल बनाने का प्रयास किया है, परन्तु बगावती समूहों की सक्रियता और न्यायालयीय प्रक्रियाओं की अनिश्चितता पार्टी के भीतर अस्थिरता को और बढ़ा रही है। अगले कुछ हफ्तों में यह देखना होगा कि क्या यह गठबंधन अपने आंतरिक संघर्षों को सुलझा कर चुनावी मैदान में मजबूत स्थिति स्थापित कर पाएगा, या फिर बगावती ताकतें पार्टी को और अधिक विभाजित कर देंगी।

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✍️ By Pradeep Yadav | 23 Jun 2026