भारत और चीन के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के बीच, चीन द्वारा पाकिस्तान को "साइट पर" समर्थन देने का आरोप भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने हाल ही में प्रकाशित बयान में कहा कि किसी भी ज़िम्मेदार राष्ट्र को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिष्ठा और स्थिति की सुरक्षा के लिये सावधानी बरतनी चाहिए। इस टिप्पणी ने चीन के इस कदम को केवल एक समरूपी रणनीतिक कदम नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा में बाधा डालने वाला एक अभिदेय माना है। सिंधूर ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के साथ तालमेल में चीन के प्रत्यक्ष सहयोग को लेकर भारत ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपना बग़ीदा मंच रखा। भारतीय अधिकारियों ने इस बात को उजागर किया कि चीन की यह सहायता सिर्फ सैन्य सहयोग नहीं, बल्कि आतंकवादी बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने का एक प्रयास है, जिससे क्षेत्रीय शांति पर गहरा असर पड़ सकता है। भारत ने कहा कि इस प्रकार की हरकतें न केवल भारत की रणनीतिक आकांक्षाओं को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चीन की विश्वसनीयता को भी धूमिल कर देगी। भारतीय सरकार ने इस मुद्दे को लेकर कई प्रमुख देशों और बहुपतीय संगठनों को लिखित स्वर में अपील की है। उनका तर्क है कि जिम्मेदार देशों को राष्ट्रीय स्वार्थ के अलावा वैश्विक सुरक्षा के प्रति भी प्रतिबद्ध होना चाहिए। भारत ने कहा कि यदि चीन पाकिस्तान को सैन्य और तकनीकी सहायता जारी रखता रहा, तो इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ेगा, और यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ जाएगा। इस बीच, चीन ने इस आरोप को अस्वीकार कर कहा कि वह किसी भी गैर-जनसम्मत गतिविधियों में शामिल नहीं है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा शांतिपूर्ण सहअस्तित्व, स्थिरता और सशक्त अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर आधारित रही है। इसलिए, ऐसे किसी भी कदम को रोका जाना जरूरी है जो इस संतुलन को बाधित करे। अंत में, भारत ने कहा कि वह अपने सभी साझेदारों के साथ मिलकर इस मुद्दे का समाधान निकालेगा और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत चीन को जवाबदेह ठहराने का प्रयास करेगा।