राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NEET‑UG) 2026 को अचानक रद्द कर दिया गया, जब नासिक पुलिस ने कागज लीक के आरोप में कई व्यक्तियों को पकड़ लिया। यह खबर देश भर में मेडिकल aspirants के बीच गहरी चिंता और गुस्सा उत्पन्न कर रही है। परीक्षा के परिणामों की घोषणा से पहले ही लीक की खबर सामने आयी, जिससे पूरे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठे। नासिक पुलिस ने बताया कि कई शहरों—नासिक, पुणे और मुंबई—में एक विस्तृत जाल का पता चला, जिसमें कम से कम पैंतालीस लोग शामिल थे। इस नेटवर्क में कागज तैयार करने वाले, वितरण करने वाले, और उन संगठनों के वरिष्ठ सदस्य शामिल थे जो छात्र अधिकारों का दावा करते थे। पुलिस के अनुसार, इस लीक के स्रोत तक पहुँचने के लिए एक विशेष समूह ने परीक्षा के प्रश्नपत्र को आधे घंटे पहले ही तैयार किया था और उसे विभिन्न माध्यमों से छात्रों तक पहुँचाया। इस मामले में कई सॉफ़्टवेयर एक्सपर्ट और प्रिंटिंग हाउस शामिल थे, जो दावे करते थे कि वे इस कार्य को ‘जाने‑बूझकर’ किया गया ताकि परीक्षा के परिणाम को प्रभावित किया जा सके। इस दौरान, कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें लीक्ड पेपर मिलने के बाद अपने परिणामों में बदलाव की आशा हुई। NEET‑UG 2026 को रद्द करने का निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा आयोजक ने तुरंत लिया, और उन्होंने सभी छात्रों को आश्वस्त किया कि आगे की कोई भी परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होगी। भारतीय मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अध्यक्ष ने इस निर्णय का स्वागत किया, जबकि कई मेडिकल aspirants ने कहा कि दो साल की कड़ी मेहनत अब व्यर्थ हो गई। छात्रों ने अभियोक्ताओं से अपील की कि उन्हें वैकल्पिक परीक्षा या पुनर्स्थापना की सुविधा दी जाए, ताकि उनका शैक्षणिक करियर बाधित न हो। इस मामले में अब पुलिस जांच जारी रखेगी, और आरोपियों को न्याय प्रक्रिया के तहत आगे लाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने भी इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कागज सुरक्षा, डिजिटल एन्क्रिप्शन और कड़ी निगरानी को अनिवार्य किया जाएगा। इस लीक स्कैंडल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत में मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की सुरक्षा को लेकर सुधार की अत्यावश्यकता है।