संयुक्त राज्य के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इराक और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य टकराव को लेकर चेतावनी जाहीर की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में शांति-समझौता ‘जीवन समर्थन’ (life support) पर टिका हुआ है, अर्थात् यह अत्यंत नाजुक स्थिति में है और एक छोटी सी चूक भी उसे गिरा सकती है। इस बीच, ईरान के संसद के स्पीकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है और वह अमेरिकी‑नाटो बलों को एक कड़ाई भरा सबक सिखाने को तैयार है। इस विकास ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तनाव को और तेज कर दिया है, और क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कई देशों को सतर्क कर दिया है। ट्रम्प ने अपनी टिप्पणी के दौरान कहा कि ईरान द्वारा प्रस्तुत शर्तें ‘बिलकुल अस्वीकार्य’ हैं और उनका कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसके साथ ही अमेरिकी तेल कीमतों में हो रही उछाल को भी नोट किया, जहाँ हर नई टकराव की संभावना ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर रही है। CNBC के अनुसार, ईरान के प्रस्ताव के अतिरिक्त, अमेरिकी प्रशासनों की ओर से लगातार दबाव और आर्थिक प्रतिबंध भी मौजूदा तनाव को बढ़ा रहे हैं। इस कारण तेल के दामों में निरंतर बढ़ोतरी देखी जा रही है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक और जोखिम का संकेत देता है। ईरान के सांसद ने अपने बयान में कहा कि ईरानी सेना ने सभी संभावित परिदृश्यों के लिए अपने बलों को तैनात कर दिया है और वह तब तक कोई कदम नहीं उठाएगा जब तक अमेरिका या उसके सहयोगी बलों ने ईरान की सीमाओं में दखल नहीं दिया। उन्होंने ‘शिक्षा’ शब्द का प्रयोग कर यह स्पष्ट किया कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी विकल्पों को खुले तौर पर इस्तेमाल करेगा। इस बयान को ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी समर्थन दे रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र में फिर से हथियारों की दौड़ शुरू होने का डर बना हुआ है। परिस्थितियों को देखते हुए, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सुलह की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख ने कहा कि शांति प्रक्रिया को जीवित रखने के लिए सभी पक्षों को संवाद-स्थली पर वापस आना चाहिए और ‘लगातार तनाव’ को समाप्त करने का सतत प्रयास करना चाहिए। कई विश्व प्रमुख देशों ने भी इस टकराव को ‘विनाशकारी’ कहते हुए दो पक्षों से आह्वान किया है कि वे अपने मतभेदों को वार्ता के जरिए सुलझाएँ। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन के हालिया बयान और ईरान के कड़े रुख ने इस दिशा में कदम उठाना कठिन बना दिया है। निष्कर्षतः, ट्रम्प की ‘जीवन समर्थन’ पर शांति-समझौते की टिप्पणी और ईरान के ‘सबक सिखाने’ के इरादे दोनों ही इस संकट को और जटिल बना रहे हैं। यदि दोनों पक्षों ने तुरंत संवाद को प्राथमिकता नहीं दी, तो न केवल मध्य पूर्व के क्षेत्र में दंगे भड़क सकते हैं, बल्कि विश्व तेल बाजार, वैश्विक आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। इस स्थितियों में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों की अत्यावश्यकता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।