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Breaking News: पाकिस्तान ने अमेरिकी प्रहार से बचने के लिए ईरान को दिया हवाई अड्डों का आश्रय, जबकि वह मध्यस्थ भी बन चुका है
🕒 1 hour ago

भारत और मध्य एशिया के बीच स्थित पाकिस्तान ने हाल ही में एक ऐसे कदम से अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी जटिल भूमिका को उजागर किया है, जिसमें वह यू.एस. और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान मध्यस्थता कर रहा था, जबकि साथ ही ईरानी सैन्य विमानों को अपने हवाई अड्डों पर ठहराने की अनुमति दे रहा था। यह कदम न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को बदल रहा है, बल्कि पाकिस्तान के विदेश नीति में नई दिशा का संकेत भी देता है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी हवाई जहाज़ों को अमेरिकी प्रहार से बचाने के लिए पाकिस्तान के कई प्रमुख एयरोड्रॉक्स, जैसे कि कोलता और बागधारी, पर अड्डा दिया गया। इस व्यवस्था के तहत ईरान के लड़ाकू विमान इन बेसों पर टेकऑफ़ और लैंडिंग कर रहे थे, जिससे अमेरिकी सैन्य बल को ईरान पर सीधा हवाई हमला करने में बड़ी झंझट उत्पन्न हुई। इस प्रकार पाकिस्तान ने अपने मध्यस्थता के इरादे को एक तरफ रखकर, वास्तविक कार्यवाही में ईरान को एक सुरक्षित आश्रय प्रदान किया। पाकिस्तान की इस नीति ने कई देशों को आश्चर्यचकित कर दिया है। जबकि पाकिस्तान ने कई बार अपने आप को शांति रक्षक और वार्ता मंच के रूप में पेश किया, वास्तविक में वह एक रणनीतिक साधन के रूप में ईरान को अमेरिकी हमले से बचाने में मदद कर रहा है। इस कदम से भारतीय, अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच सवाल उठे हैं कि क्या पाकिस्तान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार के निर्णय ले रहा है या वह अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। निष्कर्षतः, पाकिस्तान की यह कार्यवाही दर्शाती है कि वह केवल मध्यस्थ ही नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली खेलकर्ता भी बन चुका है। इसने दर्शाया कि क्षेत्रीय राजनीति में छोटे-छोटे कदम भी बड़े परिणाम ले कर आते हैं। यदि इस दिशा में और कदम बढ़ते रहे, तो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई चुनौतियों और संभावनाओं का सामना करना पड़ेगा, और इस फैसले के प्रभाव का आकलन समय के साथ ही स्पष्ट होगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 12 May 2026