सुभेंदु अधिरानी के सहायक चंद्रनाथ राठ की हत्याकांड ने पूरे देश में हंगामे मचा दिए। इस घटना की संधि तभी सुधार से बाहर हुई, जब पुलिस ने तकनीकी सबूतों की कुशलता से एक नया मोड़ दिया। प्रारम्भिक जांच में हत्यारों का पता लगाने में कई अड़चनें आईं, परन्तु तुरन्त ही एक टोल प्लाज़ा पर स्थापित सीसीटीवी कैमरों और यूपीआई भुगतान के रिकॉर्ड ने मामलों को उजागर कर दिया। हत्यारों ने हत्याकांड के बाद अपना रास्ता बदलते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न शहरों तक पहुंच बनाई थी, जहाँ से उन्हें अंततः पकड़ लिया गया। जांच की प्रमुख दिशा तब बदल गई जब टोल प्लाज़ा पर लगा कैमरा चंद्रनाथ राठ के कार दुर्घटना स्थल के पास के एक सिल्वर कार को कैद कर चुका था। उसी क्षण में, पेड किया गया यूपीआई लेनदेन का विवरण आया, जो टोल फीस का भुगतान करता था। इस लेनदेन में इस्तेमाल हुए मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी ने सीधे संदिग्धों की पहचान को संभव बना दिया। पुलिस ने इस डेटा को क्रॉस-रिफरेंस किया और उत्तर प्रदेश तथा बिहार के तीन मुख्य संदिग्धों को खोज निकाला, जिनमें से एक को शार्पशूटर के रूप में पहचाना गया था। तीन लोगों को गिरफ्तार करने की प्रक्रिया तेज़ और सटीक थी। उत्तर प्रदेश के एक छोटे गांव से शुरू हुआ पकड़ का चक्र, फिर बihar के विभिन्न शहरों में फैले संदेहियों तक फैल गया। इस दौरान, पुलिस ने कई सहयोगियों और साक्ष्यों को भी जुटाया, जिनसे पता चला कि कुल मिलाकर आठ लोग इस हत्याकाण्ड में शामिल थे, परन्तु केवल तीन को ही तुरंत हिरासत में लिया गया। अदालत ने इन तीन को 13 दिन की जमानत दे दी, जबकि जांच जारी रहने के कारण बाकी पाँच को भी जल्द ही पेश किया जाएगा। इस पूरे मामले में तकनीकी जाँच, डिजिटल फॉरेंसिक और पारंपरिक जांच के संयोजन ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की। विशेषकर, यूपीआई के माध्यम से किए गए टोल भुगतान ने पुलिस को एक सटीक ट्रैक दिया, जिससे संदेहियों के ठिकानों का पता चल सका। यह घटना यह भी दिखाती है कि आज के डिजिटल लेनदेन को केवल आर्थिक लेनदेन ही नहीं, बल्कि आपराधिक जांच का महत्त्वपूर्ण साधन भी माना जा सकता है। निष्कर्षतः, चंद्रनाथ राठ की हत्या को सुलझाने में टोल प्लाज़ा की सीसीटीवी और यूपीआई भुगतान का सही उपयोग एक निर्णायक भूमिका निभाया। इस प्रकार की तकनीकी सहायता न केवल अपराधियों को पकड़ने में मदद करती है, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए भी प्रायोगिक रूप से उपयोगी साबित हो सकती है। पुलिस के तेज़ कार्य, कानूनी प्रक्रिया और डिजिटल सबूतों के सहयोग से इस अपराधी मंडल को अंततः न्याय के कटघरे में ला दिया गया, जिससे समाज में कानून के पालन में विश्वास पुनः स्थापित हुआ।