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Breaking News: प्रधानमंत्री मोदी का तीखा प्रहार: कांग्रेस को ‘परजीवी’ कह कर राहुल गांधी की भागीदारी पर उद्धाटित रोष
🕒 1 hour ago

राजनीति के रंग मंच पर फिर एक बार तीखे शब्दों की बाज़ी लगी है। एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को "परजीवी कांग्रेस" का नाम देकर उसकी आलोचना की, जबकि आज के भारत में विपक्षी दल के प्रमुख नेता राहुल गांधी ने तमिलनाडु में हुए विजय के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया। इस दोधारी घटना ने राष्ट्रीय राजनीति में गहरी धुंध बना दी है, जहाँ एक ओर मोदी की भाषा ने अपने समर्थकों में जोश भर दिया, वहीं दूसरी ओर विपक्ष की जड़ता को उजागर किया। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि कांग्रेस ने लगातार "मित्रों का धोखा" किया है और "देश के विकास के लिए एक बाधा" बन गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सांचे में अब केवल व्यक्तिगत लाभ की इच्छा ही बची है, जिससे वह जनता के हितों के परजीवी बन गई। इस कड़ी टिप्पणी के बाद, राहुल गांधी ने कर्नाटक के एक छोटे शहर में हुई शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित होकर विजय को अभिवादन किया, जिससे मोदी की नाराज़गी फिर से छूँटी गई। राहुल की इस भागीदारी को कई लोग कांग्रेस के भीतर घातक संकेत मान रहे थे, क्योंकि यह संकेत देता है कि पार्टी ने अपने रणनीतिक गठजोड़ तोड़ कर स्वयं को स्वतंत्र रूप से स्थापित करने की कोशिश की है। इस विवाद के बीच, विभिन्न राज्यीय घनिष्ठ गठबद्धियों में भी दरारें दिखने लगी हैं। द्रविड़ मुन्नी कलयुग (DMK) ने राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस से अलग बैठने का अनुरोध किया, जबकि तमिलनाडु में कांग्रेस ने अपने गठबंधन को संभालने की कोशिश की। कई नेताओं ने इस मौके पर कांग्रेस की असफलताओं को उजागर किया, खासकर उत्तर भारत में गठबंधन के टूटने और दक्षिण में गठबंधन को लेकर उत्पन्न खतरों को लेकर। कई राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की सार्वजनिक असहमति दलों के बीच कोहेज़न को कमजोर कर सकती है और आगामी चुनाव में इनके परिणामों को प्रभावित कर सकती है। भले ही इस विवादित वाक्यांश ने प्रधानमंत्री को अपने समर्थकों के बीच अतिरिक्त ऊर्जा दी हो, परन्तु यह भी सच है कि ऐसी भाषाई गड़बड़ियों से राष्ट्रीय संवाद में तनाव बढ़ता है। राहुल गांधी ने अपने शपथ ग्रहण भाषण में बताया कि जनता के लिये विविध विचारधाराओं का होना आवश्यक है और किसी भी दल को केवल एक ही दिशा में धकेलना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। यह वक्तव्य उनके अनुयायियों के लिये एक सन्देश बन गया कि वे भी आवाज़ उठाने से नहीं डरेँगे। निष्कर्षतः, प्रधानमंत्री मोदी की "परजीवी कांग्रेस" वाली तीखी टिप्पणी ने भारतीय राजनीति में नई ज्वैलिन्ट पैदा कर दी है, जबकि राहुल गांधी का शपथ ग्रहण में भागीदारी एक संकेत है कि विपक्ष भी अपनी नीतियों में बदलाव की पहल कर रहा है। इस समीकरण को देखते हुए, आगामी चुनावों में गठबंधनों की स्थिरता और रचनात्मक संवाद ही प्रमुख भूमिका निभाएगा, जिससे भारतीय लोकतंत्र का भविष्य तय होगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 10 May 2026