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Breaking News: विनाइल वंदे मातरम्! तमिलनाडु के सीएम वेंकटेश पर दहाड़, भाजपा को धक्का
🕒 1 hour ago

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री वी. के. चेन्नई स्वीकृति समारोह में पूरा वंदे मातरम् बजाने के बाद, सीएम वी.के. जयंत सिंह तिरुमला ने एक अलग ही तरीके से संदेश दिया, जिसने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचाई। इस अवसर पर उन्होंने न केवल राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान किया, बल्कि एक अनुशासनहीन टिप्पणी भी की, जिससे भाजपा के नेताओं को सटीक संकेत मिला कि उनका राजनीतिक दबाव काम नहीं करेगा। घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब तमिलनाडु सरकार ने अपने प्रमुख राजनीतिक दल के रैली में वंदे मातरम् को पूरी तरह से बजाने का निर्णय लिया। इस कदम ने सभी श्रमिकों और आम जनता का समर्थन अर्जित किया, क्योंकि राष्ट्रीय गान को पूरी श्रद्धा के साथ बजाना हमेशा एक सम्मान की बात रही है। हालांकि, इस आयोजन के बाद सीएम ने संसद में अपने शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कुछ ऐसे शब्द इस्तेमाल किए जो असभ्य माने गए। भाजपा के प्रमुख नेताओं ने तुरंत इस पर सवाल उठाए और इसे उनका 'दुश्मन को ताना मारना' कहा। इस घटना को देखते हुए कई राजनीतिक टिप्पणीकारों ने कहा कि यह एक स्पष्ट संकेत है कि तमिलनाडु की सरकार अब राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के विरोधी रुख को और अधिक दृढ़ता से पेश कर रही है। सीएम ने अपनी टिप्पणी में 'भाजपा के झॉटों' को 'भड़काने' की बात कही, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वह दिल्ली में चल रहे राजनीतिक ताने-शाने को फिसलन भरा समर्थन नहीं देंगे। एक बड़े समाचार पोर्टल ने इस घटना को "संकट के समय में सीएम की साहसिक गलती" के रूप में वर्णित किया। वर्तमान में, तमिलनाडु में वंदे मातरम् के साथ-साथ 'तमिल थाई वाझ्थु' का भी उपयोग किया गया, जिससे कुछ राजनैतिक दलों ने इस मुद्दे को उठाया कि क्या राष्ट्रीय गान को अन्य प्रदेशीय गीतों के साथ मिलाकर पेश करना चाहिए। कई राजनेताओं ने इस बात पर टिप्पणी की कि यह नीति राष्ट्रीय एकता के सिद्धांत से बेमेल है। फिर भी, इस पूरी घटना के बाद भाजपा के नेताओं ने इस बात को भी कहा कि "हम ऐसे संकेतों को अनदेखा नहीं करेंगे" और वह तमिलनाडु में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए नई रणनीति तैयार करेंगे। अंत में यह कहा जा सकता है कि वंदे मातरम् के पूर्ण प्रदर्शन के साथ सीएम की असभ्य टिप्पणी ने भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय लिखा है। यह घटना न केवल तमिलनाडु में, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक दलों के बीच संबंधों को पुनर्स्थापित करने की जरूरत दर्शाती है। यदि दोनों पक्ष संवाद और शांति के माध्यम से इस विवाद को सुलझाते हैं, तो यह राष्ट्रीय एकता और सामंजस्य के लिए एक सकारात्मक दिशा तय कर सकता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 10 May 2026