तमिलनाडु के मुख्यमंत्री वीजय के पहले बड़े सार्वजनिक भाषण के बाद प्रदेश के मुख्य विरोधी और डीएमके के राष्ट्रीय प्रमुख एमके स्टालिन ने तत्काल प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति में कोई अभाव नहीं है, बल्कि "धन तो है, पर कुशल प्रशासन की कमी" है। स्टालिन ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा बताई गई 10 लाख करोड़ रुपये की देनदारी का आंकड़ा गलत है और यह "परवानगी योग्य सीमाओं के भीतर" है। उनका यह बयान कई मीडिया संस्थाओं में व्यापक रूप से प्रकाशित हुआ, जिससे राजनीतिक परिदृश्य में नई हलचल मची। स्टालिन ने अपने बयान में उल्लेख किया कि तमिलनाडु में कई बड़े विकास परियोजनाएं शुरू हो रही हैं और सरकार के पास इन योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त निधि उपलब्ध है। उन्होंने कहा, "धन तो है, पर इसे सही दिशा में इस्तेमाल करना अत्यंत आवश्यक है। अगर प्रशासनिक ढाँचा कमजोर रहेगा, तो चाहे जितना भी पैसा हो, विकास की गति नहीं बढ़ पाएगी।" उन्होंने वीजय को भी सलाह दी कि "समय-समय पर आर्थिक आँकड़ों की जाँच‑परख करके जनता के सामने पारदर्शिता रखे"। इस बीच, वीजय ने अपने भाषण में कहा था कि तमिलनाडु की वर्तमान देनदारी 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है, जिसे स्टालिन ने "भ्रामक" बताया। स्टालिन की इस टिप्पणी पर तमिलनाडु के कई राजनैतिक विश्लेषकों ने अलग-अलग राय प्रकट की। कुछ ने कहा कि स्टालिन ने वित्तीय वास्तविकताओं को कम आँका है, जबकि अन्य ने इस बात की सराहना की कि उन्होंने प्रशासनिक कार्यक्षमता की ओर ध्यान दिलाया। वहीं, वीजय ने उत्तर में कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ राज्य की आर्थिक स्थिति को स्पष्ट करना नहीं, बल्कि जनता को वास्तविक आँकड़े प्रदान करना है। उन्होंने यह भी कहा कि "धन के सही उपयोग के लिए पारदर्शी योजना बनाना और उसका कार्यान्वयन ही मुख्य लक्ष्य होना चाहिए"। अंत में कहा जा सकता है कि इस वार्तालाप ने तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर नई चर्चा को जन्म दिया है। स्टालिन ने स्पष्ट रूप से बताया कि राज्य के पास निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, परंतु उनका कुशल प्रयोग अनिवार्य है। इस बिंदु पर यदि दोनों पक्ष मिलकर एक सशक्त और पारदर्शी नीति बनाते हैं तो तमिलनाडु के विकास में नई ऊर्जा का संचार हो सकता है।