तमिलनाडु के मुख्यमंत्री वी.के. सुशांत के समर्थन में बने ड्रमांकित गठबंधन की शपथ लेने के समारोह में राष्ट्रगान "वन्दे माता राम" का पूर्ण बजाना और उसके बाद भारत के राष्ट्रीय गान "जन गण मन" का गान हुआ। यह कार्यक्रम तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में रात्रि दो बजे आयोजित किया गया, जिसमें कई प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य नेता उपस्थित थे। शपथ के बाद, सीपीआई (एमएओ) के अतिथियों ने दो प्रमुख मुद्दों पर सवाल उठाए: एक तो तमिल थाई वाज़्थु (தமிழ் தாய் வாழ்த்து) का अनदेखा रहना और दूसरा प्रधानमंत्री के आदेश के अनुसार "वन्दे माता राम" को राष्ट्रीय गान के स्थान पर नहीं रखा गया। विधानसभा शपथ के दौरान, मुख्यमंत्री वी.के. सुशांत ने "वन्दे माता राम" को पूरी धुन में गाकर सभी उपस्थित लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। इस गान के बाद, पुलिस अधिकारी ने भारत के राष्ट्रीय गान "जन गण मन" का स्वर प्रदान किया, जिससे सभा में एक राष्ट्रीय एकता का माहौल बने रहा। इस दौरान, कुछ सीपीआई के प्रतिनिधियों ने ध्यान दिलाया कि तमिल थाई वाज़्थु— तमिलनाडु का एक पारम्परिक गीत— को इस मंच पर सम्मिलित नहीं किया गया, जबकि यह प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्य है। उनका कहना था कि इस गीत को नहीं बजाने से तमिलनाडु के लोगों के सांस्कृतिक अधिकारों की अनदेखी की गई है। सीपीआई के प्रवक्ता ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय भक्ति गीत "वन्दे माता राम" को आत्मीयता से गाने के महत्व पर ज़ोर दिया और कहा कि यदि दो बार राष्ट्रीय गान बजाने से भाग लेने वाले लोगों की भावना को रुख्सत किया जा रहा है तो यह शासकों की बिचारी नीति का संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस तथा डीएमके के गठबंधन की यह शपथ समारोह की एक नई रणनीति है, जिसमें राष्ट्रीय गान को उपेक्षित करने की कोशिश नहीं बल्कि एक सन्देश देना है— कि स्थानीयता को प्राथमिकता देना चाहिए। इस पर मुख्यमंत्रियों, भाजपा के आयुक्त और राष्ट्रवादी नेताओं ने इस बात को सराहा कि "वन्दे माता राम" को पूर्ण रूप से बजाना लोकतांत्रिक भावना का एक अद्भुत उदाहरण है। अधिकांश मीडिया रिपोर्टों ने इस शपथ समारोह को एक राजनीतिक बयान के रूप में पेश किया। टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा कि सुशांत ने "वन्दे माता राम" को प्रमुखता से गाकर बीजेपी के राष्ट्रीय आंदोलन को चुनौती दी, जबकि द हिंदू ने इस कदम को "देशभक्ति की अभिव्यक्ति" कहा। एनडीटीवी ने इस बात को रेखांकित किया कि गान के बाद "जन गण मन" का गान भी जनता के एकजुटता को दर्शाता है। इन सभी रिपोर्टों के बीच प्रमुख सवाल यह बना रहता है कि क्या तमिल थाई वाज़्थु को इस राष्ट्रीय मंच पर शामिल किया जाना चाहिए था या नहीं। इस विवाद के प्रकाश में, सभी पक्षों ने भविष्य में शपथ समारोहों में सांस्कृतिक विविधता को सम्मानित करने की जरूरत पर ज़ोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय गान का सम्मान करना आवश्यक है, परंतु राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता। इस प्रकार, "वन्दे माता राम" और तमिल थाई वाज़्थु दोनों को सम्मिलित करके एक संतुलित रूप प्रस्तुत किया जा सकता है, जिससे राष्ट्रीय एकता और स्थानीय पहचान दोनों का सम्मान हो सके। यह घटना भारतीय लोकतंत्र की बहु-सांस्कृतिक धरती पर एक नया संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।