तमिलनाडु की विधानसभा चुनावी बाँटवारा फिर से आँधियों के गर्त में फँस गया है। विपक्षी गठबंधन के प्रमुख नेता वी.के. विजय ने हाल ही में वी.सी.के (विकासवादी कांग्रेस गठबंधन) और बाएँ दलों को लिखा पत्र, जिसमें वह अपनी सरकार बनाने की योजना में उनका समर्थन मांग रहा है। इस कदम से यह स्पष्ट हो रहा है कि वर्तमान सरकार के पतन के बाद राज्य में सत्ता का संतुलन फिर से बदलने की संभावना तेज़ी से उभर रही है। विजय ने अपने पत्र में बताया कि उनकी पार्टी के पास पर्याप्त मतदाताओं का साहस है, परंतु अकेले सरकार स्थापित करने के लिये पर्याप्त स्वतंत्रता नहीं है। इसके चलते उन्होंने वी.सी.के और बाएँ दलों से साझेदारी की गुहार लगाई है, जिससे एक संयुक्त बहुमत तैयार हो सके और राज्य में स्थिर सरकार स्थापित की जा सके। पत्र में विजय ने बताया कि उनका मुख्य लक्ष्य जनसुरक्षा, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूलभूत मुद्दों को प्राथमिकता देना है। उन्होंने कहा कि यदि वी.सी.के और बाएँ दलों का सहयोग मिला तो एक ऐसी सरकार बनायी जा सकती है, जो सभी वर्गों के हितों को बराबर संभाले। इस बीच, राज्यपाल ने भी इस गठबंधन के बारे में सतर्कता से टिप्पणी की है और कहा है कि अस्थिरता की स्थितियों में केवल स्पष्ट बहुमत ही सरकार स्थापित करने के लिये पर्याप्त है। अपने लिखे पत्र में विजय ने यह भी कहा कि उन्होंने सभी संभावित सहयोगियों से बातचीत की है, परंतु अभी तक किसी पक्ष ने स्पष्ट रूप से समर्थन नहीं जताया है, जिससे सरकार बनाना अभी कठिन ही प्रतीत होता है। विपक्षी दलों की इस संभावित गठबंधन को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में हलचल मची हुई है। वी.सी.के के प्रमुख नेता इस प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं और अपने समर्थन को अंतिम रूप देने से पहले कई रणनीतिक कारकों का मूल्यांकन कर रहे हैं। बाएँ दलों भी इस मोड़ पर अपने मतदाताओं की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए फैसला करना चाहते हैं। इस बीच, वर्तमान में सत्ता में रहने वाली पार्टी के भीतर भी कई अंदरूनी बहसें चल रही हैं, क्योंकि उन्हें भी अपने अधिकार को बरकरार रखने के लिये नए गठबंधन की तलाश करनी पड़ सकती है। संपूर्ण स्थिति को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि तमिलनाडु में नई सरकार की संभावना अभी भी धुंधली है, परंतु यदि वी.के. विजय का प्रस्ताव सफल रहा तो राज्य में एक नया संतुलन स्थापित हो सकता है। जनता को अब इन प्रतिनिधियों से स्पष्ट जवाबों की आवश्यकता है, ताकि आगामी दिनों में सत्ता की दिशा स्पष्ट रूप से निर्धारित हो सके। अंत में कहा जा सकता है कि तमिलनाडु की राजनीति की इस चरणबद्ध यात्रा में सभी दलों को पारदर्शिता और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ काम करने की जरूरत है, तभी राज्य की स्थिरता और विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा।