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Breaking News: नकली नंबर प्लेट, ग्लॉक 47X पिस्तौल और निकटवर्ती गोलीबारी: सुंदेव अधिकारी के सहायक की हत्याका काला रहस्य
🕒 1 hour ago

सुंदेव अधिकारी के भरोसेमंद सहायक चंद्रनाथ रथ की मौत ने पश्चिम बंगाल के राजनीति में गहरी चिंताएं उत्पन्न कर दी हैं। यह हत्याकांड साधारण अपराध नहीं बल्कि सुस्पष्ट रूप से तैयार किया गया एक टार्गेटेड हमला माना जा रहा है। घटनाक्रम के अनुसार, रथ को एक साधारण ड्राइविंग रूट पर निशाना बनाया गया, जहाँ एक नकली नंबर प्लेट से सुसज्जित वाहन ने अचानक उनके सामने रुककर निकटवर्ती दूरी से कई बार गोलियां चला दीं। गोलीबारी के बाद घटनास्थल से तुरंत ही हिंदुस्तानी और यूरोपीय मानक की ग्लॉक 47X पिस्तौलें बरामद हुईं, जो इस बात का सूचक है कि हमलावर के पास उच्च स्तरीय सैन्य या अर्ध-सरकारी संसाधन उपलब्ध थे। जांच की शुरुआती रिपोर्ट से पता चलता है कि इस हत्याकांड में दो प्रमुख तत्व सम्मिलित थे – तकनीकी सहायता और व्यवस्थित योजना। नकली नंबर प्लेट के प्रयोग से अपराधियों ने पुलिस की नज़र से बचने के लिये पहचाने में कठिनाई पैदा की, जबकि ग्लॉक 47X जैसे उन्नत हथियारों का चयन यह संकेत देता है कि लडाई में प्रयुक्त युक्ति अत्यधिक सटीक और निर्मित थी। पुलिस ने संकेत मिला कि इस हत्याकांड में संभावित तौर पर कोई बाहरी शक्तियाँ, जिनका राजनीतिक हित हो, शामिल हो सकती हैं। इस बीच, सुंदेव अधिकारी ने कहा कि उनकी टीम के इस सदस्य को निशाना बनाकर किया गया प्रतिशोध "भयावह और अस्वीकार्य" है और वे न्याय के त्वरित प्रवाह की माँग कर रहे हैं। हिंदी के प्रमुख समाचार पत्रों ने इस गिरफ्तारी के बाद में उत्तर 24 परगना में तनावपूर्ण माहौल की रिपोर्ट कर दी है। स्थानीय जनता में डर और असुरक्षा का माहौल तेज़ी से बढ़ रहा है, जबकि सुरक्षा बलों को कड़ा करके आश्रय प्रदान करने के निर्देश मिले हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों ने बताया कि साक्षी व गवाहों को संरक्षित किया जा रहा है, परन्तु प्रतिशोध की आशंका अभी भी बनी हुई है। इस घटना ने राज्य सरकार को भी गहराई से चिंतित कर दिया है, जिससे वह सभी सुरक्षा उपायों को दोबारा जांचने का वचन दिया है। निष्कर्षतः, चंद्रनाथ रथ की हत्याकांड न केवल एक व्यक्तिगत विनाश का उदाहरण है, बल्कि यह दिखाता है कि राजनीतिक दांव पर चल रही प्रतिस्पर्धा में अत्यधिक हिंसा के उपकरण किस प्रकार उपयोग में लाए जा रहे हैं। इस घटना का पर्दाफाश इस बात को स्पष्ट करता है कि उच्चस्तरीय हथियारों और धोखाधड़ी वाले पहचान चिन्हों के साथ निर्मित टार्गेटेड हमले अब एक नया खतरा बनकर उभरे हैं। सरकार, पुलिस और मीडिया का सामूहिक प्रयास इस मामले की सच्चाई उजागर करने और फिर ऐसे कुख्यात अपराध को रोकने के लिये आवश्यक है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास बना रहे और नागरिकों को सुरक्षित महसूस हो।

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✍️ By Pradeep Yadav | 07 May 2026