Kotputli News
राजस्थान राज्य

राजस्थान में भेड़ियों के अस्तित्व पर मंडराया गंभीर संकट, 85 प्रतिशत वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों के बाहर

वर्ष 2026 की नवीनतम गणना के अनुसार राजस्थान में भेड़ियों की कुल संख्या सिमटकर मात्र 467 रह गई है, जो वन्यजीव प्रेमियों के लिए गहरी चिंता का विषय है। इनमें से 396 भेड़िए यानी करीब 85 प्रतिशत वन्यजीव संरक्षित जंगलों की परिधि से बाहर निवास कर रहे हैं। पर्याव

K
Kotputli News प्रकाशित: 07 Nov 2026, 07:30 AM
⏱ 4 मिनट का समय • 👁 1,017 बार देखा गया
यह समाचार अंग्रेजी में भी उपलब्ध है: Read in English →
राजस्थान में भेड़ियों के अस्तित्व पर मंडराया गंभीर संकट, 85 प्रतिशत वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों के बाहर
राजस्थान में भेड़ियों के अस्तित्व पर मंडराया गंभीर संकट, 85 प्रतिशत वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों के बाहर फोटो आभार: News18 Rajasthan State Wire
समाचार सुनें

0:00 / ~4:00
शेयर करें: 15 शेयर
WhatsApp Facebook

राजस्थान के वन्यजीव संरक्षण हलकों में चिंता की एक बड़ी लहर दौड़ गई है जब वर्ष 2026 की गणना के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इन आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में भेड़ियों के अस्तित्व पर एक गंभीर और आसन्न संकट मंडरा रहा है, जिससे संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं। व्यापक सर्वेक्षण रिपोर्ट पुष्टि करती है कि पूरे प्रदेश में अब केवल 467 भेड़िए ही शेष बचे हैं, जो इन वन्यजीवों की घटती संख्या को दर्शाती है।

ऐतिहासिक रूप से राजस्थान के विस्तृत शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्र देशी वन्यजीव प्रजातियों को स्वतंत्र रूप से विचरने, प्रजनन करने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए उपयुक्त प्राकृतिक गलियारे प्रदान करते आए हैं। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में तीव्र गति से बढ़ते औद्योगिकीकरण, आक्रामक खनन गतिविधियों, कृषि योग्य भूमि के विस्तार और सड़कों के व्यापक जाल ने इस प्राकृतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। इन संरचनात्मक परिवर्तनों ने भेड़ियों के पारंपरिक आवासों को खंडित कर दिया है, जिससे उनकी आवाजाही के रास्ते बाधित हुए हैं।

वर्ष 2026 की गणना के सूक्ष्म विश्लेषण से एक बेहद चिंताजनक भौगोलिक वितरण सामने आया है, जिसके अनुसार दर्ज कुल 467 भेड़ियों में से 396 यानी लगभग 85 प्रतिशत वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों और अभ्यारण्यों की सीमा से बाहर पाए गए हैं। औपचारिक रूप से संरक्षित क्षेत्रों के भीतर शेरगढ़ सेंचुरी में सबसे अधिक 39 भेड़िए दर्ज किए गए। इसके विपरीत, संरक्षित सीमाओं के बाहर झुंझुनूं जिला 74 भेड़ियों के साथ पहले स्थान पर रहा, जो यह साबित करता है कि बहुसंख्यक आबादी इंसानी बस्तियों के करीब रहने को मजबूर है।

संरक्षित क्षेत्रों के बाहर इतनी बड़ी संख्या में भेड़ियों का निवास करना इन वन्यजीवों को सीधे तौर पर मानवीय बस्तियों, मवेशी चराने वाले क्षेत्रों और वाणिज्यिक गतिविधियों के संपर्क में लाता है। वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का मानना है कि इस प्रकार के अतिव्यापन से अक्सर स्थानीय ग्रामीण समुदायों और मांसाहारी वन्यजीवों के बीच तनाव पैदा होता है। जब तक इन दूरदराज के क्षेत्रों में पर्याप्त कानूनी सुरक्षा उपाय और वन्यजीव गलियारे विकसित नहीं किए जाते, तब तक इन शेष बचे झुंडों का जीवन खतरे में रहेगा।

क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो कोटपूतli-बहरोड़ और आसपास के जिलों जैसे क्षेत्रों में तीव्र औद्योगिक एवं कृषि विकास के कारण स्थानीय जीव-जंतुओं पर भारी दबाव पड़ रहा है। कृषि भूमि के लगातार बढ़ते दायरे और सड़कों के विस्तार ने वन्यजीवों को बेहद संकुचित क्षेत्रों में सिमटने के लिए मजबूर कर दिया है। स्थानीय ग्रामीण समुदायों को अक्सर इन विस्थापित वन्यजीवों के साथ अपनी साझी संपत्तियों को साझा करना पड़ता है, जिसके लिए सुनियोजित प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता है ताकि किसी भी तरह के संघर्ष को टाला जा सके।

इस गंभीर पारिस्थितिक संकट की गहराई को देखते हुए जाने-माने पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। भेड़ियों की इस दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जाजू ने राज्य सरकार और वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि गोडावण पक्षी की तर्ज पर भेड़ियों के संरक्षण के लिए भी एक विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इन वन्यजीवों के संरक्षण हेतु एक समर्पित कार्ययोजना और मजबूत कानूनी सुरक्षा का होना निहायत जरूरी है।

भविष्य की रूपरेखा को लेकर वन्यजीव प्रेमियों और सामाजिक संगठनों की निगाहें अब प्रशासनिक तंत्र पर टिकी हैं कि वे 2026 की जनगणना के इन आंकड़ों का संज्ञान लें। आगे का रास्ता यही मांग करता है कि आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक संतुलित तालमेल बिठाया जाए। यदि समय रहते इन 467 बचे हुए भेड़ियों, विशेषकर संरक्षित क्षेत्रों से बाहर रह रहे 85 प्रतिशत वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राजस्थान अपनी समृद्ध प्राकृतिक विरासत के एक महत्वपूर्ण हिस्से को खो सकता है।

Featured Creator Deep | @deepdrives.in
Deep | @deepdrives.in

📸 Deep | @deepdrives.in

🚗 Kotputli Ka Ladka • Car Creator

Real owner reviews, tested mileage & hidden car hacks! Join 10K+ automobile lovers.

K

Kotputli News

सत्यापित पत्रकार

कोटपूतली-बहरोड़ जिला संवाददाता एवं संपादकीय डेस्क

तथ्य-जांच सत्यापित

यह समाचार रिपोर्ट कोटपूतली न्यूज़ संपादकीय आचार संहिता के तहत प्रकाशित की गई है। यदि आपको इसमें कोई तथ्यात्मक त्रुटि प्रतीत हो तो सुधार हेतु संपर्क करें।

संबंधित खबरें

राजस्थान राज्य • 08 Nov 2026

सरदार समंद बांध: पश्चिमी राजस्थान का 119 साल पुराना ऐतिहासिक इंजीनियरिंग चमत्कार

पाली जिले में स्थित 119 साल पुराना सरदार समंद बांध पश्चिमी राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा बांध है जिसे महाराजा सरदार सिंह ने बनवाया था। यह ऐतिहासिक जल भंडार कृषि के लिए जीवनरेखा, पर्यटन का प्रमुख केंद्र और वास्तुकला की एक मिसाल बना हुआ है। यह संरचना पूरे क्ष

⏱ 5 मिनट का समय 👁 1,011
राजस्थान राज्य • 08 Nov 2026

अजमेर में स्टील के गिलास में पटाखा फोड़ने से चार बच्चे घायल, दो की स्थिति गंभीर

अजमेर के शंकर नगर नगरा इलाके में एक खतरनाक घटना सामने आई है जहाँ स्टील के गिलास में पटाखा फोड़ने से चार बच्चे घायल हो गए। इस शक्तिशाली धमाके से स्टील के टुकड़े चारों तरफ बिखर गए, जिससे दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। जेएलएन अस्पताल में डॉक्टरों की टीम घ

⏱ 3 मिनट का समय 👁 1,013
राजस्थान राज्य • 08 Nov 2026

राजस्थान मौसम अपडेट: तापमान सामान्य से ऊपर रहने के कारण कड़ाके की ठंड का इंतजार बढ़ा

नवंबर का पहला सप्ताह बीतने के बावजूद राजस्थान में दिन और रात का तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है जिससे कड़ाके की ठंड का इंतजार बढ़ गया है। मौसम विभाग के अनुसार 8 नवंबर को पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के सभी जिलों में मौसम पूरी तरह शुष्क रहेगा और बारिश को ले

⏱ 5 मिनट का समय 👁 1,014
राजस्थान राज्य • 08 Nov 2026

झालावाड़: कालीसिंध थर्मल पावर यूनिट चालू, राजस्थान को मिला 600 मेगावाट बिजली का तोहफा

दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले राजस्थान को बड़ी ऊर्जा राहत मिली है, क्योंकि झालावाड़ स्थित कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट की दो महीने से बंद पड़ी यूनिट ने पुनः उत्पादन शुरू कर दिया है। इस महत्वपूर्ण बहाली से प्रदेश को 600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलेगी, जिसस

⏱ 4 मिनट का समय 👁 1,015
K
कोटपूतली न्यूज़ ऐप इंस्टॉल करें

फास्ट लोडिंग व मोबाइल ऐप अनुभव

🍪

हम बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव, विश्लेषण और प्रासंगिक विज्ञापनों (Google AdSense) के लिए कुकीज़ का उपयोग करते हैं। गोपनीयता नीति पढ़ें

✓ Success