दिवाली के पावन पर्व से ठीक पहले राजस्थान भर में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से और खतरनाक रूप से गिरने लगा है, जिससे पूरे प्रदेश में गंभीर स्वास्थ्य चिंताएं पैदा हो गई हैं। मौसम में आए बदलाव के साथ ही औद्योगिक और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन ने मिलकर वातावरण को पूरी तरह से दूषित कर दिया है। 06 Nov 2026 को प्रदेश के प्रमुख शहरी केंद्रों और औद्योगिक क्षेत्रों में आसमान में धुंध की घनी परत छा गई है।
ऐतिहासिक रूप से, सर्दियों के महीनों की शुरुआत के साथ तापमान में होने वाले व्युत्क्रमण के कारण धूल और धुएं के कण जमीन की सतह के पास ही फंस जाते हैं। पराली जलाने, वाहनों के भारी दबाव और लगातार चल रहे निर्माण कार्यों के साथ मिलकर यह स्थिति क्षेत्रीय आबोहवा को भारी बना देती है, जिससे हर साल शरद ऋतु और शुरुआती सर्दियों में जहरीली हवा का एक चक्र बन जाता है।
जमीनी रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश की प्रमुख औद्योगिक नगरी भिवाड़ी में स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है, जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई 373 के खतरनाक स्तर को पार कर गया है। इसके साथ ही, राजधानी जयपुर में भी प्रदूषण का आंकड़ा 272 दर्ज किया गया है, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है और सीधे तौर पर आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन गया है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, स्थानीय नागरिकों और चिकित्सा चिकित्सकों ने इन खतरनाक आंकड़ों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। हवा में मौजूद प्रदूषण के सूक्ष्म कणों के कारण सांस के मरीजों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते कई लोगों को अपनी दैनिक बाहरी गतिविधियों को सीमित करने और चिकित्सा सहायता लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
यह बिगड़ती हवा की गुणवत्ता केवल कुछ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने अपने जहरीले प्रभाव को कई अन्य क्षेत्रीय जिलों में भी फैला दिया है। सवाई माधोपुर, जोधपुर, बीकानेर और कोटा जैसे प्रमुख शहरों में भी वायु की शुद्धता और गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो यह दर्शाता है कि यह संकट पूरे राज्य को प्रभावित करने वाली एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बन चुका है।
इस बढ़ते प्रदूषण संकट के मद्देनजर स्थानीय निकाय प्रशासन और पर्यावरण निगरानी एजेंसियों पर कड़े उत्सर्जन मानदंडों और धूल नियंत्रण उपायों को सख्ती से लागू करने का भारी दबाव है। प्रशासनिक अधिकारी औद्योगिक क्षेत्रों में अनुपालन उपायों की समीक्षा कर रहे हैं और हवा की गुणवत्ता को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए आपातकालीन हस्तक्षेपों पर विचार कर रहे हैं।
जैसे-जैसे दिवाली का उत्सव नजदीक आ रहा है, नागरिकों और नागरिक प्रशासनों के सामने उत्सव के उल्लास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। प्रदूषण नियंत्रण दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन, अत्यधिक धुआं करने वाले पटाखों के प्रयोग में कमी और प्रशासनिक सतर्कता आने वाले हफ्तों में राजस्थान के प्रभावित क्षेत्रों में सांस लेने योग्य हवा बहाल करने के लिए अत्यंत आवश्यक होगी।