भाजपा के दो बड़े दलों के मिलन के बाद राजनीतिक परिदृश्य में पहले बड़े असंतोष का संकेत मिला है, जब संसद सदस्य राघव चढ़ा ने अरविंद केजरीवाल के नए बनवाए "शीश महल 2" बंगलो को निशाना बनाया। इस टिप्पणी ने देश के कई किंगडम मीडिया हाउसेस में चर्चा का मुद्दा बना दिया। चढ़ा ने स्पष्ट किया कि नई इमारत का श्रेणीय डिज़ाइन और बेकार महंगे सामान का उपयोग जनता के धन को चाकू से काटने जैसा है। उन्होंने कहा, "यदि यह शहरी विकास का नया रूप है तो इसे जनता को समझाने की जरूरत है, न कि फोटोशॉप की मदद से झूठी छवि पेश करने की।" केजरीवाल की नई लोधी एस्टेट बंगलो की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैलीं, जहां इंटीरियर की चमकदार मोरक्कन शैली को "शीश महल 2" का नाम दिया गया। कई विवादास्पद फोटो में अलंकृत शीशे, मख़मली सोफ़े और महंगे कलाकृतियां दिखती हैं, जो आम जनता के लिये अत्यधिक लग्ज़री प्रतीत होती हैं। भाजपा ने इस पर मानते हुए कहा कि यह बंगलो "वास्तविकता से कोसों दूर" है और उसका अभिप्राय राजनीति में ध्रुपद बनाकर वोटरों को मानोनी करना है। इसके जवाब में आम आदमी पार्टी ने इन तस्वीरों को नकली और फर्जी इंगित करते हुए, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से आग्रह किया कि असली बंगलो का वास्तविक चित्र दिखाया जाए। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि "शीश महल 2" का प्रयोग केवल एक फसाना है, जिससे केजरीवाल को अति-भोगविलास की आभा देना है। उन्होंने यह भी कहा कि यह बंगलो बड़े खर्चे में बनवाया गया है, जबकि आम जनता के लिये रोज़मर्रा की समस्याएं बनी हुई हैं। इस बीच, कई राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि इस तरह के बड़े प्रचार को कूटनीति के एक हिस्से के रूप में देखा जा सकता है, जिससे सत्ता में रहने वाले लोग अपनी छवि को चमकाने के लिए व्यक्तिगत संपत्ति का प्रयोग करते हैं। निष्कर्षतः, "शीश महल 2" विवाद ने भारतीय राजनीति में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच तीव्र प्रतिस्पर्धा को उजागर किया है। जबकि केजरीवाल के समर्थकों ने इसे प्रगति और विकास का प्रतीक बताया, विपक्षी दलों ने इसे जनता के पैसे का दुरुपयोग कहा। इस अभूतपूर्व विवाद ने न केवल राजनैतिक बहस में नई ऊर्जा भर दी, बल्कि आम नागरिकों को भी इस मुद्दे पर सोचने पर मजबूर किया है कि सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग किस प्रकार किया जाना चाहिए। आगे चलकर यह मामला क्या आकार लेगा, यह जनता की राय और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।