नई दिल्ली- सामाजिक कार्यकर्ता और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के प्रमुख अन्ना हजारे ने हाल ही में रुड़े हुए राजनैतिक माहौल में अपनी तीखी टिप्पणी दी। उन्होंने बताया कि अगर आपनाप (आम आदमी पार्टी) ने अपने मूल सिद्धांतों पर कायम रहते और "सही" दिशा में कदम बढ़ाते, तो राघव चधा, शरद पवार, सुषमा स्वराज और कई अन्य सांसद पार्टी छोड़कर भाजपा में नहीं शिफ्ट होते। हजारे ने इस बात को स्पष्ट करते हुए कहा, "जब तक आप पार्टी के संस्थागत मूल्यों को नहीं समझते, तब तक कोई भी विधायक आत्मविश्वासपूर्वक टिक नहीं पाता।" यह टिप्पणी तब आई जब राघव चधा ने आपनाप छोड़कर भाजपा में शामिल हो कर कांग्रेस के प्रमुख नेता अरविंद केजरीवाल को भारी चौंका दिया था। हजारे ने अपनी टिप्पणी में आपनाप के सिद्धांतों को दोहराते हुए कहा कि पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल ने "सप्लाई साइड" पर भरोसा नहीं किया, बल्किको "डिमांड साइड" पर काम करने का वादा किया था। उन्होंने यह भी कहा कि "सही मार्ग" पर चलने का मतलब है लोगों की बेसिक जरूरतों को समझना और उन्हें पूरा करने के लिए नीतियों में पारदर्शिता बरकरार रखना। इस संदर्भ में, चधा के राजनैतिक बदलाव को हजारे ने "भय" नहीं, बल्कि "निराशा" कहा, क्योंकि उन्होंने पार्टी की शुध्द विचारधारा से विमुखता महसूस की। इस विवाद को लेकर कई राजनैतिक विश्लेषकों ने कहा कि आपनाप के भीतर असंतोष की जड़ें केवल व्यक्तिगत मतभेद नहीं हैं, बल्कि नीति-निर्धारण में विविधता की कमी भी है। अन्ना हजारे ने इस मुद्दे को और स्पष्ट करते हुए बताया कि यदि आपनाप ने "शेष महल 2.0" जैसी योजनाओं को जनता की वास्तविक जरूरतों के साथ जोड़ कर प्रस्तुत किया होता, तो कई विधायक और समर्थक पार्टी में बने रहते। उन्होंने इस योजना को "धोखा" कहा, जिससे विचारधारा में अंतराल बढ़ता है। आखिरकार, हजारे ने आपनाप के लिए एक चेतावनी दी और कहा कि पार्टी को तुरंत अपने मूल सिद्धांतों पर पुनर्विचार करना चाहिए, ताकि भविष्य में और अधिक सांसदों का त्याग न हो। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि "सही मार्ग" पर चलने वाले नेताओं को जनता का भरोसा मिलना ही नहीं, बल्कि उनके बीच में एकजुटता भी बनती है। इस प्रकार अन्ना हजारे ने इस राजनैतिक बदलाव को एक अवसर के रूप में देखा, जिसमें आपनाप को अपनी नींव को फिर से सुदृढ़ करना चाहिए, तभी वह भविष्य में भी राजनीतिक मंच पर मजबूती से खड़ा रह सकेगा।