बीजेपी ने हाल ही में एक तेज़ी से फैलाई गई तस्वीर श्रृंखला में अरविंद केजरीवाल को 'रहमान डाकू' का लिबास देकर दिल्ली के लोधी एस्टेट बंगलो को 'शिश महल 2' का टाइटल दी दिया। यह चित्रों का उद्देश्य केजरीवाल की व्यक्तिगत संपत्ति को लेकर विवाद को और भड़काना था। तस्वीरों में दिखाए गए लुधियाना, सोने की जड़ित चादरें और महंगे फर्नीचर को लेकर पार्टी ने कहा कि यह "शिश महल" का नया संस्करण है और केजरीवाल ने इस संपत्ति को निजी रूप से खर्च किया है। अाप की ओर से इस चित्र श्रृंखला को पूरी तरह से नक्कली बताया गया, तथा रीढ़ के केंद्र शासकीय आदेशों का पालन करते हुए लोधी एस्टेट को आधिकारिक निवास बनाकर रह रहे केजरीवाल के खिलाफ विशेष जांच की मांग की गई। केजरीवाल ने जवाब में कहा कि लोधी एस्टेट के बंगले में रहने का आदेश कोर्ट के आदेशों के अनुसार है और वह इस बिंदु पर कोई भी अतीत का कलंक नहीं झेलता। अाप ने कहा कि तस्वीरें नक्कली हैं और इसे बनाने का प्रयोजन राजनीति में बदनामी फैलाना है। पार्टी ने केजरीवाल की नीतियों और सार्वजनिक वित्त पर सवाल खड़े कर उन्हें 'डाकू' कहने की तुलना एक बिगड़ते हुए राजनेता का रूपक माना। अाप के प्रमुख आंदोलनकर्ता रेखा गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल ने कबाब कारावास झेले हैं, फिर भी वे जनता के हित में काम कर रहे हैं और इस तरह की फर्जी खबरों से अंत में सिर्फ अणधर पार्टी की ही छवि बिगड़ती है। बड़ी मीडिया रिपोर्टों ने इस मुद्दे को कई पहलुओं से पर्दा उठाया है। द टाईम्स ऑफ इंडिया ने बताया कि BJP ने "शिश महल 2" की तस्वीरें सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर शेयर कीं, जबकि ThePrint ने कहा कि यह तस्वीरें पुरानी और मोसमी हैं, जिनमें वास्तविकता से बहुत हटकर सजा दी गई है। देक्कन हरिबल ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी अदालती आदेश के अनुपालन में केजरीवाल ने लोधी एस्टेट में स्थानांतरित हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कदम वैधानिक क्रम का ही हिस्सा है। निष्कर्षतः, भाजपा द्वारा केजरीवाल को 'रहमान डाकू' और 'शिश महल 2' का टैग लगाकर चलाए गए हमले ने राजनीतिक माहौल में नई लहरें पैदा कर दी हैं। अाप ने इस आरोप को झूठा ठहराते हुए, अपने न्यायकर्ता राजनैतिक कार्यों को जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया है। अब यह देखना बाकी है कि इस विवाद के आगे क्या तौर-तरीके अपनाए जाएंगे और किस हद तक यह मुद्दा चुनावी लड़ाई में प्रभावी साबित होगा।