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Breaking News: ट्रिनामूल पक्ष के 20 विद्रोही सांसदों का राष्ट्रीय नागरिक पार्टी के साथ मिलन, NDA का समर्थन
🕒 16 hours ago

काकोलि घोष दास्तिदार ने हाल ही में एक बड़ी राजनीतिक साजिश का खुलासा किया, जिसमें 20 विद्रोही ट्रिनामूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद राष्ट्रीय नागरिक पार्टी (एनसीपीआई) के साथ मिलकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने का इरादा रखते हैं। यह कदम पश्चिम बंगाल की राजनीति में असंतुलन पैदा कर रहा है और केंद्र सरकार के लिए एक संभावित जीत की ओर इशारा कर रहा है। काकोलि घोष, जो स्वयं टीएमसी की प्रमुख नेता हैं, ने कहा कि यह गठबंधन पार्टी के भीतर चल रहे भीतर के संघर्ष को समाप्त करने और कांग्रेस के साथ एकत्रित रूप से काम करने का एक तरीका है। उन्होंने यह भी बताया कि इन सांसदों ने अपने मतभेदों को सुलझाने के लिए राष्ट्रीय नागरिक पार्टी के साथ मिलकर एक नई प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया है, जिससे वे केंद्र में होने वाली राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे। ट्रिनामूल कांग्रेस के भीतर इस बंटवारे के मुख्य कारणों में से एक पार्टी के नेतृत्व के प्रति निराशा और कांग्रेस की राष्ट्रीय नीतियों से असहमत होना रहा है। कई सांसदों ने कहा कि उन्होंने कर्ज, रोजगार और विकास के मुद्दों पर केंद्रीय सरकार से बेहतर सहयोग की आशा की है, जो उन्हें वर्तमान टीएमसी नेतृत्व से नहीं मिल रही थी। इस कारण वे राष्ट्रीय नागरिक पार्टी के साथ जुड़कर एक स्वतंत्र आवाज़ बनना चाहते हैं, जो उन्हें राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से खड़े होने की सुविधा देगा। इस दौरान, टीएमसी के अध्यक्ष अभिषेक बनर्जी ने इस कदम का कड़ा विरोध किया और स्पीकर को निर्देश दिया कि वे इस विद्रोह को आधिकारिक मान्यता न दें, क्योंकि यह पार्टी की एकता को कमजोर कर सकता है। एनसीपीआई के साथ इस मिलन से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन को भी बड़ी राहत मिलती है। भाजपा ने इस बदलाव को सकारात्मक रूप में देखा है और कहा है कि यह दर्शाता है कि कई राज्य स्तर की पार्टियों में विचारधारा का शून्यभरण हो रहा है और वे राष्ट्रीय एकजुटता की ओर बढ़ रहे हैं। भाजपा ने यह भी कहा कि इस कदम से एनडीए का समर्थन करने वाले सांसदों की संख्या बढ़ेगी, जिससे केंद्र सरकार को स्थिरता मिल सकेगी। दूसरी ओर, दहलीज के भीतर कई विश्लेषकों ने इस कदम को ‘विचारधारा की खाई को पाटने’ के रूप में दर्शाया है, क्योंकि अब टीएमसी के भीतर की असंतुष्ट आवाज़ें राष्ट्रीय मंच पर अपनी बात रखने का अवसर पा रही हैं। इस परिवर्तन के बाद, पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया चरण आरम्भ हो रहा है। यदि यह मिलन सफलतापूर्वक स्थापित हो जाता है, तो यह न केवल टीएमसी के भीतर की खींचतान को समाप्त कर सकता है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक नई शक्ति संतुलन स्थापित कर सकता है। दूसरी ओर, पार्टी के भीतर इस तरह के विभाजन से भविष्य में अन्य राज्यों में भी समान हुड़दंग उठ सकते हैं, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में अनिश्चितता बढ़ सकती है। इस समय यह देखना होगा कि क्या यह गठबंधनों का नया स्वरूप केंद्र सरकार और राज्य की विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा या फिर वैरता को बढ़ावा देगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 14 Jun 2026