ओमान के समुद्र तट के पास एक बड़ी मालवाहक जहाज़ को अचानक इंजन में गंभीर तकनीकी ख़ामी का सामना करना पड़ा, जिससे जहाज़ को गति रोकनी पड़ी और निकटवर्ती जलधारा में फँस गया। इस आपातकालीन स्थिति में जहाज़ पर मौजूद 14 भारतीय दल के सदस्य, जिसमें कप्तान तथा विभिन्न विभागों के तकनीशियन शामिल थे, को भारी जोखिम का सामना करना पड़ा। भारतीय मछुआरों और समुद्री व्यापारियों की संघठन ने तुरंत इस घटना की जानकारी भारतीय दूतावास को दी, जिससे भारतीय नौसेना ने बचाव के लिए योजना बनाई। इसी बीच, अमेरिकी नौसेना ने भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत इस बचाव कार्य में सहयोग करने का प्रस्ताव रखा। अमेरिकी नौसेना के अटलांटिक फ्लोटिलिया में तैनात एक एचएसएस (हेलीकॉप्टर सपोर्ट शिप) ने जल में फंसे जहाज़ के पास पहुँचकर एक हेलीकॉप्टर कक्ष स्थापित किया। इस कक्ष से दो हेलीकॉप्टर उतारे गये, जिनमें सत्रह बचाव विशेषज्ञ और आवश्यक चिकित्सा उपकरण लगे थे। टीम ने तुरंत जहाज़ के डेक पर चढ़ते हुए सभी 14 भारतीयों को सुरक्षित रूप से हेलीकॉप्टर में बिठाया और उन्हें निकटतम पोर्ट, मस्कट के भीतरी बंदरगाह तक ले जाया गया। बचाव के दौरान कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। जहाज़ के इंजन की विफ़लता के कारण धुंध और धुंधलापन बढ़ गया था, जिससे हेलीकॉप्टर की लैंडिंग मुश्किल हो गई। साथ ही, समुद्री लहरों की तेज़ गति ने बचाव कर्मियों को निरंतर संतुलन बनाए रखने की चुनौती पेश की। फिर भी, दोनों देशों के समुद्री सुरक्षा दलों ने उत्कृष्ट समन्वय और टीम वर्क का परिचय देते हुए समय पर सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाला। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के महत्व को फिर से उजागर किया है। भारतीय सरकार ने इस बचाव कार्य की सफलतापूर्वक समाप्ति पर खुश होते हुए कहा कि भारतीय यात्रियों की सुरक्षा में सहयोगी देशों के साथ सहयोग अनिवार्य है। भारतीय नौसेना ने भविष्य में ऐसे आपातकालीन मामलों के लिए जलजमीनी क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को और सुदृढ़ करने का संकल्प लिया। अंततः, सभी 14 भारतीय दल के सदस्य बिना किसी चोट के सुरक्षित घर वापस लौट पाए, जबकि व्यावसायिक जहाज़ को बाद में मरम्मत के लिए मोरक्को के एक मरम्मत कड़े में भेजा गया।