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Breaking News: डीएमके ने 8 जून के INDIA ब्लॉक बैठक से किया बहिष्कार: कांग्रेस के ‘धोखा’ पर तीखा विरोध
🕒 1 hour ago

राजनीतिक हलचल के परिप्रेक्ष्य में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और द्रविड़ मुन्ना करुण्‍नालय (डीएमके) के बीच बढ़ता झगड़ा देश के कई राज्य में चुनावी समीकरणों को फिर से लिख रहा है। 8 जून को निर्धारित INDIA ब्लॉक की राष्ट्रीय बैठक को लेकर दोनों पार्टियों के बीच नई टकराव की दहलीज पर खड़ी हो गई है। कांग्रेस ने अपने गठबंधन में बदलाव और किनारे पर रखे हुए उम्मीदवारों को लेकर डीएमके को झुका दिया, जिससे डीएमके ने इस महत्त्वपूर्ण बैठक को पूर्णत: बहिष्कृत करने का फ़ैसला किया। यह कदम केवल एक साधारण असहमति नहीं, बल्कि आगामी राज्य चुनाव में शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाले एक बड़े राजनीतिक खेल का हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि वह राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत मोर्चा बनाने के लिए कई दलों के साथ मिलकर काम कर रही है और इस प्रक्रिया में कुछ कठिन निर्णय लेना अनिवार्य है। इस बीच, डीएमके के वरिष्ठ नेता एम.के. स्टालिन ने एकत्रित सांसदों को बताया कि कांग्रेस द्वारा विशेष रूप से तमिलनाडु में गठबंधन को तोड़ने के लिए किए गए कदमों को "धोखा" कहा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी की छवि और भविष्य की रणनीति को बचाने के लिये, कांग्रेस के इस रुख को स्वीकार नहीं किया जा सकता, इसलिए उन्होंने 8 जून की बैठक में भाग नहीं लेने का निर्णय लिया। इस बहिष्कार के परिणामस्वरूप, राष्ट्रीय स्तर पर भारत ब्लॉक की आवाज़ में संभावित कमज़ोरी आ सकती है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डीएमके जैसे प्रमुख केंद्र-बिना दल इस मंच से हट जाएँ तो विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर प्रश्न उठेंगे और यह नयी रणनीतिक लाइनें बनाने की जरूरत को उत्पन्न करेगा। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में सत्ता संतुलन बदलने की संभावना है, जहाँ दोनों राज्यों में कांग्रेस और डीएमके के गठबंधन ने अब तक एक मजबूत बुनियाद रखी थी। अंततः, इस विवाद से स्पष्ट है कि आगामी चुनावी दौड़ में पार्टियों के बीच सच्ची गठबंधन भावना कठिनाई से ही बनी रहेगी। कांग्रेस को अपनी रणनीति पुनः निर्धारित करनी पड़ेगी, जबकि डीएमके को अपने समर्थकों को भरोसा दिलाने के लिये अपने कदमों की वैधता साबित करनी होगी। साथ ही, इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में नई दिशा की ओर इशारा किया है, जहाँ हर गठबंधन का भविष्य मतदान की गिनती पर निर्भर करता है, न कि केवल जुमले या घोषणापत्र पर। 8 जून की बैठक का बहिष्कार निस्संदेह भारतीय लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत है, और आने वाले महीनों में इसके प्रभाव को देखना बाकी है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 04 Jun 2026