प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज के मंत्रिसभा के सत्र में यह स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है भविष्य की दिशा को निर्धारित करने का और "विकसित भारत" के वादे को साकार करने के लिए सभी लटके हुए कार्यों को तुरंत समाप्त करना जरूरी है। उनका यह संदेश केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने प्रत्येक मंत्री से अपील की कि वे अपने-अपने विभागों में लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता दे कर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करें। इस सत्र में विभिन्न विकासात्मक क्षेत्रों—जैसे बुनियादी ढाँचा, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और कृषि—में अभूतपूर्व गति लाने के संकेत मिले। मंत्रियों को खास तौर पर यह निर्देश दिया गया कि नीतियों की प्रभावशीलता को मापने के लिए स्पष्ट टाइमलाइन तैयार की जाए और उन पर कड़ी निगरानी रखी जाए। मंतियों के बीच हुई गहन चर्चा में यह बात उजागर हुई कि कई प्रमुख योजनाओं की शुरुआत तो हो चुकी है, परंतु उनकी गति धीमी है। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति का मूल आधार समयपर कार्यान्वयन है, और इसीलिए अब अनुचित विलंब को समाप्त कर, परियोजनाओं को तयशुदा समयसीमा के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि "विकसित भारत" की कल्पना केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि हर गांव, हर कस्बे को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने की आवश्यकता है। इस दिशा में जल-संचयन, ग्रामीण सड़क, डिजिटल कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जाएगी। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री ने इस मंत्रिसभा को एक निर्णायक मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि यदि लटके हुए कामों को जल्द समाप्त कर दिया गया तो भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को एक मजबूत और विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित कर सकेगा। इस प्रकार, इस बैठक के बाद सभी विभागों ने काम की गति बढ़ाने के लिए विशेष कार्यकम तैयार किए हैं, जिसमें प्रगति की नियमित रिपोर्ट, समय-समय पर समीक्षा और जरूरी संसाधनों की त्वरित उपलब्धता शामिल है। अंत में मोदी ने सभी मंत्रियों से यह वचन मांगा कि वे "विकसित भारत" के सपने को साकार करने में अपना सर्वश्रेष्ठ दें और देश को आगे बढ़ाने में कोई कसर न छोड़ें।