ब्योनिक टर्मिनल पर अचानक हुए इस दुखद घटनाक्रम के बाद ट्विशा शर्मा के परिवार ने न्याय की उम्मीद में कई दिशाओं में पैर रखे। दफन के बाद दो महीने से अधिक समय बीतते ही, उनके माता-पिता ने दोबारा पोस्टमॉर्टम करवाने की मांग की, मानते हुए कि पहली जांच में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य छूट गए हो सकते हैं। लेकिन भोपाल उच्च न्यायालय ने इस याचिका को खारिज कर दिया, जिससे परिवार के मन में निराशा की लहर दौड़ गई। कोर्ट ने अपने कारणों में यह बताया कि पोस्टमॉर्टम की पहली रिपोर्ट में कोई अनियमितता नहीं पाई गई और जांच प्रक्रिया में सभी सिद्धांतों का पालन किया गया था। पुलिस ने भी इस बात पर कोई आपत्ति नहीं जताई और कहा कि मृतक की मृत्यु का कारण पहले ही स्पष्ट कर दिया गया है। इसके अलावा, बीपीएल (भोपाल पुलिस) के प्रमुख ने कहा कि वे मामले की फाइल को विस्तृत रूप से देख रहे हैं और अदालत को केस डायरी का अध्ययन करने की अनुमति देंगे। परिवार ने इस निर्णय पर गहरा अफसोस जताते हुए कहा कि उनका मानना है कि द्वितीय पोस्टमॉर्टम से उन्होंने कुछ नई साक्ष्य प्राप्त कर सकते थे, विशेषकर दहेज हत्या के मामलों में अक्सर छिपे हुए तथ्यों को उजागर करने के लिए। उन्होंने मुख्यमंत्री और मौजूदा सांसद से भी मुलाकात की, परंतु अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। राज्य सरकार ने भी इस घटना को गंभीरता से लेते हुए CBI को जांच की सिफारिश की है, परन्तु कोर्ट ने अभी तक इस अनुरोध पर टिप्पणी नहीं की है। ये सब देख कर यह स्पष्ट है कि ट्विशा शर्मा की मौत के पीछे की सच्चाई अभी तक पूरी तरह से उजागर नहीं हुई है। न्याय प्रक्रिया में कई बार कई मोड़ आते हैं, परन्तु हर कदम पर यह देखना आवश्यक है कि पीड़ित के अधिकारों की रक्षा के लिये सभी संभव उपाय किए जाएँ। अब न्यायालय के फैसले के बाद, परिवार को भिन्न-भिन्न विधिक और प्रशासनिक उपायों का सहारा लेना पड़ेगा, ताकि इस केस में अंततः न्याय की जीत सुनिश्चित की जा सके।