दिल्ली‑कोलकाता राजमार्ग के पास स्थित सिलिगुड़ी के रणनीतिक ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर में पश्चिम बंगाल सरकार ने 120 एकड़ जमीन केंद्र को सौंपने की योजना की पुष्टि की है। यह संकुचित शेष भाग, जो भारत-भूटान और भारत-नीपाल सीमा के निकट स्थित है, राष्ट्रीय सुरक्षा और बुनियादी ढाँचा विकास के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस कदम से केंद्र सरकार को इस क्षेत्र में अपनी सुरक्षा और विकासात्मक पहलों को तेज़ी से आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा, जबकि राज्य सरकार ने भी इस हस्तांतरण को प्रदेश के समग्र उन्नयन की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है। ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर का महत्व ‘चिकन नेक’ शब्द का प्रयोग भारत के उत्तरी‑पूर्वी हिस्से में स्थित संकरी भौगोलिक पट्टी के लिए किया जाता है, जहां से न केवल भारत‑भूटान और भारत‑नीपाल सीमा को जोड़ा जाता है, बल्कि यह दक्षिण‑पूर्व एशिया के साथ भूमि-आधारित कनेक्टिविटी के लिये भी एक प्रमुख द्वार है। इस कॉरिडोर में स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग, रेल लाइन और कई हवाई अड्डे सुरक्षा की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माने जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे की कमी, बाढ़‑प्रभावित भूमि और असुरक्षित सड़क नेटवर्क की वजह से कई बार सुरक्षा एवं विकास में बाधाएँ उत्पन्न हुई हैं। इसलिए केंद्र ने इस कॉरिडोर में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिये अस्थायी तौर पर कई अंतःस्थलीय परियोजनाएँ शुरू की थीं, पर राज्य सरकार के साथ तालमेल की कमी के कारण कई काम लम्बे समय तक रोके रहे। हस्तांतरण के पीछे की पृष्ठभूमि सिलिगुड़ी में स्थित इस 120 एकड़ जमीन को अब केंद्र के नियंत्रण में लाने का प्रस्ताव पिछले साल के अंत में आया, जब राष्ट्रीय रक्षा नीति और पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी योजना दोनों में इस क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई थी। इस जमीन में मुख्यतः दो राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ दो प्रमुख सीमा‑किनारे के बिन्दु शामिल हैं, जहाँ से द्विपक्षीय व्यापार और सैन्य गति का विशेष महत्व है। राज्य सरकार ने इस हस्तांतरण को “सुरक्षा‑आधारित विकास” के नाम पर समर्थित किया है, और कहा है कि केंद्र द्वारा इस क्षेत्र में किए जाने वाले अद्यतन कार्यों से स्थानीय जनसंख्या को भी रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। केंद्रीय एजेंसियों का योगदान और आगे की योजना जैसे ही जमीन का अधिकार केंद्र को सौंपा जाएगा, राष्ट्रीय राजमार्ग और सीमा सुरक्षा के प्रमुख विभाग जैसे राजमार्ग एवं राजभवन विभाग, भारतीय सेना तथा सीमा नियंत्रण बल तुरंत कार्यवाही शुरू करेंगे। पहली प्राथमिकता के रूप में मौजूदा सड़क नेटवर्क को चौड़ा करना, बुरे जल निकासी को सुधारना और बाढ़‑प्रवण क्षेत्रों में दृढ़ीकरण कार्य करना रहेगा। साथ ही, इस कॉरिडोर में एक नया व्यावसायिक हब और लॉजिस्टिक सेंटर स्थापित करने की योजना भी तैयार है, जिससे भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में वस्तु प्रवाह में तेज़ी आएगी। निष्कर्षतः, सिलिगुड़ी के ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर में 120 एकड़ जमीन का केंद्र को हस्तांतरण केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, बुनियादी ढाँचा और आर्थिक विकास के एक महत्त्वपूर्ण संकल्प का प्रतीक है। यह कदम क्षेत्रीय कौशल को बढ़ावा देगा, स्थानीय लोगों को नई नौकरियों की संभावना देगा और भारत की सीमाओं की रक्षा को सुदृढ़ करेगा। सभी हितधारकों को मिलकर इस परियोजना को सफल बनाने की आवश्यकता है, ताकि ‘चिकन नेक’ को केवल एक भू‑संकुचन नहीं, बल्कि एक मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध कनेक्टिविटी हब में परिवर्तित किया जा सके।