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Breaking News: साथी के पति ने दिया 50,000 रुपये मासिक: एक्जीक्यूटिव जुड़वाँ न्यायाधीश ने दहेज के आरोपों को खारिज किया
🕒 1 day ago

भापोरा (भोपाळ) के हाई कोर्ट में चल रहे ट्विशा शर्मा हत्याकांड में सबूत संगर्ष और सामाजिक दबाव दोनों का परदा खुलता दिख रहा है। 22‑वर्षीय ट्विशा के शव की दफ्न के बाद उसके पति दुर्लभ कारक वेंकटेश ने दहेज के आरोपों को ठुकराते हुए कहा कि वह अपनी पत्नी के लिये हर महीने 50,000 रुपये नियमित रूप से देता आया है। यह बयान पिछले सप्ताह एक्जीक्यूटिव जुड़वाँ न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) संजय कुमार कोशली ने कोर्ट में दिया, जब अभियोजन पक्ष ने दहेज के प्रमाण प्रस्तुत कर रहे थे। नेत्रहीन आरोप के विपरीत, कोशली ने कहा कि दहेज लेन‑देन का कोई ठोस दस्तावेज़ नहीं है और केवल मौखिक गवाही पर भरोसा करना क्लासिक न्यायिक त्रुटि है। उन्होंने यह भी कहा कि वैवाहिक संबंध के भीतर आर्थिक सहायता को दहेज के रूप में समझना, सामाजिक न्याय के माहौल को नुकसान पहुँचाता है। कहानी की जड़ में ट्विशा की कॉलेज‑स्थलीय दोस्ती से शुरू हुई एक ऑनलाइन डेटिंग एप के माध्यम से मुलाकात हुई, जहाँ वेटेश से प्रेम में पड़ गई। शादी के बाद घर में उनके परिवारिक दबाव की कहानी भी सामने आई, जहाँ ट्विशा के पिता ने बार‑बार कहा कि शादी को बचाने के लिये उन्हें आर्थिक सहायता की जरूरत है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, जब ट्विशा ने अपने स्वभाविक जीवन शैली को बनाए रखने की कोशिश की, तो घर में आर्थिक तनाव बढ़ा, और यही विवाद का कारण बना। लेकिन न्यायाधीश कोशली ने इस बात पर बल दिया कि आर्थिक प्रतिबद्धताएं और दहेज दो अलग‑अलग मुद्दे हैं, और सिर्फ़ 50,000 रुपये की मासिक भुगतान को दहेज के रूप में मानना, कानूनी तौर पर प्रमाणित नहीं है। अब तक जांच में कई मोड़ आए हैं। एआईआईएमएस के फॉरेंसिक रिपोर्ट ने बताया कि ट्विशा की लटकन से जुड़ी बेल्ट को डॉक्टरों को नहीं दिखाया गया था, जो साक्ष्य के रूप में महत्वपूर्ण हो सकता था। पुलिस ने वेंकटेश को घर से भागते हुए पायी और बेमाकूल बयान दिया कि वह आत्महत्या का शिकार हुआ। परन्तु पिता ने कहा कि ट्विशा के पास कोई आत्महत्या के निशान नहीं थे और उसके बंधुओं ने उसे दम घोने की कोशिश की। इस बीच, न्यायालय ने वेंकटेश को प्री‑अरेस्ट बाइल से इनकार कर दिया, जबकि पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सूचना देनदारों का इनाम घोषित किया। अंत में यह कहा जा सकता है कि इस केस में सामाजिक दबाव, पारिवारिक टकराव और कानूनी जटिलताएँ एक साथ मिलकर जटिल परिदृश्य बना रही हैं। दहेज के आरोप से लेकर आर्थिक सहायता तक के अंतर को स्पष्ट करने हेतु न्यायिक प्रक्रिया को साक्ष्य‑आधारित और संवेदनशील होना चाहिए। ऐसे मामले राष्ट्रीय मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और कानूनी विमर्श को प्रभावित करते हैं, और यह आवश्यक है कि सभी पक्ष निष्पक्ष जांच और तेज़ न्याय के माध्यम से अंततः सत्य का पता लगा सकें।

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✍️ By Pradeep Yadav | 19 May 2026