भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोप की यात्रा के दौरान अस्लो में भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया, जिससे दो देशों के बीच आर्थिक और वैज्ञानिक सहयोग का नया अध्याय लिखा गया। इस उद्घाटन का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के उद्योग, प्रौद्योगिकी, और अनुसंधान क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करके द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाना था। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शब्दों में भारत के नवाचार और जलवायु परिवर्तन के समाधान में नॉर्वे के साथ साझेदारी को महत्व दिया, और दोनों देशों की कंपनियों को स्थायी विकास की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया। समारोह में अनेक प्रमुख नॉर्वेजियन कंपनियों ने अपने अनुभव साझा किए और भारत में निवेश के अवसरों को उजागर किया। नॉर्वे के व्यापारी और उद्योगपति ने कहा कि भारतीय बाजार में प्रवेश करने के लिए नियामक ढांचा सरल बनाना आवश्यक है, और उन्होंने अपने व्यापारिक मॉडल को भारतीय उपभोक्ता की आवश्यकताओं के अनुसार ढालने की जरूरत पर बल दिया। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, व्यापारिक बाधाओं को कम करने और निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बनाने का वचन दिया। इन संवादों के दौरान दो देशों के बीच ऊर्जा, नवीकरणीय स्रोत, समुद्री तकनीक, और हाई-टेक नवाचार क्षेत्रों में कई समझौते भी हस्ताक्षरित हुए। शिखर सम्मेलन के दौरान सहयोग के कई क्षेत्रों को उजागर किया गया। नॉर्वे ने आर्कटिक अनुसंधान, सैटेलाइट तकनीक, और समुद्री विज्ञान में अग्रणी भूमिका निभाते हुए भारत को अपने अनुभव साझा करने का प्रस्ताव रखा। वहीं भारत ने अपनी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शक्ति, विशेषकर अंतरिक्ष और डिजिटल विकास को नॉर्वे के साथ मिलकर नवाचार के नए प्रयोगों में लागू करने का संकेत दिया। इन विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी न केवल आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, और सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी सहायक होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर का उपयोग विश्व की प्रमुख चुनौतियों—जैसे यूक्रेन संघर्ष और मध्य एशिया के तनाव—पर संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान खोजने के लिए भी किया। उन्होंने कहा कि भारत का विदेश नीति सहयोग, संवाद और शांति स्थापित करने पर आधारित है, और यूरोपीय देशों के साथ इस दिशा में सुदृढ़ साझेदारी को वह प्राथमिकता देगा। इस प्रकार, अस्लो में हुआ यह शिखर सम्मेलन न केवल व्यापारिक लाभों को साकार करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की सक्रिय भूमिका को भी स्पष्ट करता है। समापन में मोदी ने कहा, "भारत और नॉर्वे का सहयोग नवाचार, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि के पथ पर चलने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है।" इस संबोधन के बाद दो देशों के बीच कई नई परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार हुई, जिनमें जलवायु परिवर्तन के लिए संयुक्त अनुसंधान, नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग, और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल इकोसिस्टम का निर्माण शामिल है। अस्लो में इस उद्घाटन ने स्पष्ट कर दिया कि भारत यूरोप का सबसे महत्वपूर्ण नवाचार और जलवायु साझेदार बनने की दिशा में दृढ़ कदम बढ़ा रहा है।