प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस हफ़्ते यूरोप के स्कैंडिनेवियाई देशों में अपने आधिकारिक दौरे के हिस्से के तौर पर नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंचे। ओस्लो में भारत‑नॉर्वे व्यापार एवं अनुसंधान शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने दो देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का गौरवान्वित अवसर प्रदान किया। इस महत्वपूर्ण सभा में भारत, नॉर्वे और यूरोपीय संघ के कई प्रमुख आर्थिक प्रतिनिधि, प्रौद्योगिकी उद्यमी, शोध संस्थान और निवेशकों ने हिस्सा लिया। शिखर सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दोहरावदार बयानों में कहा कि भारत और नॉर्वे दोनों ही सतत विकास, साफ ऊर्जा और नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि "पर्यावरण की रक्षा और आर्थिक समृद्धि के बीच संतुलन बनाना ही भविष्य की दिशा है"। इस अवसर पर नॉर्वे के प्रधानमंत्री और विदेशी मामलों के मुख्य मंत्री ने भारत को एक अति सम्मानजनक नागरिक सम्मान – असातस्जेर्लिगर मॅनतस्काबिलिटेट – प्रदान किया, जो भारत‑नॉर्वे संबंधों के इतिहास में एक नई प्रतिबद्धता का प्रतीक है। शिखर सम्मेलन में विभिन्न सत्रों के माध्यम से दो देशों के व्यापारिक सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा हुई। ऊर्जा क्षेत्र में नॉर्वे के हाइड्रोजन और बायो‑मैथेन प्रौद्योगिकी को भारत के नवीकरणीय ऊर्जा पथ के साथ जोड़ने की योजना बनाई गई। औद्योगिक क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहन घटकों, समुद्री तकनीक और औषधीय अनुसंधान को प्रमुख सहयोगी बिंदु के रूप में चिन्हित किया गया। साथ ही, जलवायु परिवर्तन के प्रति संयुक्त उपायों के हिस्से के तौर पर "ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप" की घोषणा की गई, जिससे दोनों देशों के बीच स्वच्छ ऊर्जा में निवेश को $10 अरब तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया। व्यापार को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने नॉर्वे के प्रमुख उद्योगपतियों को भारत में निवेश करने के लिये एक विशेष प्लेटफ़ॉर्म भी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। "ईएफ़टीए" (इवेंट फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट) के तहत, भारत में $100 अरब के निवेश को आकर्षित करने के लिये विभिन्न कर रियायतें और आसान अनुमति प्रक्रियाओं की व्यवस्था की जाएगी। इस पहल से नॉर्वे की नवीकरणीय ऊर्जा, समुद्री ड्रोन तकनीक और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में धंधे करने वाले कंपनियों को भारतीय बाजार में आसानी होगी। शिखर सम्मेलन के अंत में भारत और नॉर्वे ने कई संधियों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने की समझौते, शैक्षिक विनिमय कार्यक्रम और स्टार्ट‑अप इन्क्यूबेशन फ़ंड का निर्माण शामिल है। यह सभी कदम भारत के विदेश नीति में "डायालॉग और डिप्लोमेसी" के सिद्धांत को सुदृढ़ करने के व्यापक उद्देश्यों के साथ संगत हैं, जैसा कि प्रधानमंत्री ने यूरोप के कई देशों के साथ अपने संवाद में कहा था। समग्र रूप में, ओस्लो में इस समृद्ध शिखर सम्मेलन ने भारत‑नॉर्वे सम्बन्धों को नई ऊर्जा से भर दिया है। आर्थिक साझेदारी के अलावा, यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सतत विकास और शांति के प्रति प्रतिबद्धता को भी उजागर करती है। निकट भविष्य में इस सहयोग से उत्पन्न होने वाले निवेश, नई तकनीकें और पर्यावरणीय पहलें न केवल दोनों देशों को बल्कि वैश्विक समुदाय को भी फायदेमंद साबित होंगी।