भारत में सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में हालिया प्रश्नपत्र लीक के बाद देशव्यापी गुस्सा और चिंता देखी जा रही है। इस मुद्दे को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों ने सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ दायर की हैं। इन याचिकाओं में मूलभूत सुधारों की माँग की गई है, जिनमें डिजिटल लॉकिंग, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का पुनर्संरचन, प्रश्नपत्र की सुरक्षा में कड़ी सख्ती और नई निगरानी प्रणाली शामिल है। इस लेख में हम इन माँगों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे और देखेंगे कि कोर्ट द्वारा अब तक किन‑किन पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया गया है। पहली और सबसे प्रमुख माँग है प्रश्नपत्र को डिजिटल रूप में लॉक करना, ताकि पेपर तैयार करने से लेकर परीक्षा समाप्ति तक किसी भी असंगत हाथ में न पड़ सके। वर्तमान में प्रश्नपत्र को कागज पर तैयार कर फिर उसे एन्क्रिप्टेड फ़ाइल के रूप में भेजा जाता है, परन्तु कई बार तकनीकी चूकों से यह फ़ाइल चोरी हो गई है। याचिकाकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि पूरे प्रक्रिया को ब्लॉकचेन जैसी अपरिवर्तनीय तकनीक से सुरक्षित किया जाए, जिससे प्रत्येक चरण में साक्षी तथा डिजिटल हस्ताक्षर की पुष्टि हो सके। इसके अलावा, NTA को एक स्वतंत्र और पारदर्शी निकाय में पुनर्संरचित करने की भी माँग की गई है, ताकि उसकी कार्यप्रणाली में किसी भी राजनैतिक या आर्थिक दबाव का प्रभाव न पड़े। यह पुनर्संरचन एक नई गवर्निंग बोर्ड की स्थापना, सख्त भर्ती मानदंड और नियमित ऑडिट प्रक्रिया को सम्मिलित कर सकती है। दूसरी महत्वपूर्ण माँग है परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र की निगरानी के लिए एक सुदृढ़ तंत्र की स्थापना। याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में प्रश्नपत्र को एन्क्रिप्ट करने के बाद भी कई बार अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा उस पर पहुँच बना ली गई है। इसलिए, एक राष्ट्रीय स्तर की डिजिटल फॉरेंसिक टीम बनाई जानी चाहिए, जो हर चरण में डेटा के स्रोत और सुरक्षा लॉग को रीयल‑टाइम में मॉनिटर करे। साथ ही, विभिन्न राज्य स्तर पर भी इस कार्य को लागू करने के लिए एक सामंजस्यपूर्ण मॉडल तैयार किया जाना चाहिए, जिससे असमानता समाप्त हो और सभी परीक्षार्थियों को समान अवसर मिले। इन माँगों के अलावा, कई याचिकाओं में प्रश्नपत्र लीक के पीछे के कारकों को समाप्त करने के उपाय भी सुझाए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, परीक्षा केंद्रों में एंटी‑ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक जामरूपी उपकरणों की रोकथाम और कागज‑आधारित प्रश्नपत्र के बजाय पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत परीक्षा प्रणाली अपनाने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही, लीक करने वाले व्यक्तियों के लिए कड़ी सजा और आर्थिक दंड की व्यवस्था का प्रस्ताव भी किया गया है, जिससे भविष्य में इस प्रकार के अपराधों को रोका जा सके। अंत में, सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं को सुनने की घोषणा की है और कई प्रमुख पक्षों, जिनमें NTA के मुख्य कार्यकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि, तथा परीक्षा प्रबंधन के विशेषज्ञ शामिल हैं, को सत्र में बुलाया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि ये सुधार समय पर नहीं किए गए तो परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठेंगे और भविष्य में ऐसी कदाचार को रोकने के लिए विधायी कदम उठाए जा सकते हैं। इस प्रकार, NEET परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा को पुनर्स्थापित करने के लिए डिजिटल लॉकिंग, NTA की पुनर्संरचन और कठोर निगरानी प्रणाली को लागू करना अनिवार्य हो गया है।