नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष अपनी यूरोपीय यात्रा के हिस्से के रूप में नॉरडिक देशों की दो‑दिन की यात्रा शुरू की। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक सुरक्षा के मुद्दों पर मीटिंग्स करना था। नॉरडिक देशों के नेता, जिनमें नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे, स्वीडन, फिनलैंड और डेनमार्क के प्रतिनिधि शामिल थे, ने मोदी के स्वागत में कहा कि भारत-नॉरडिक संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए यह अवसर महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारतीय कंपनियों को नॉरडिक बाजार में विस्तार करने के लिये आवश्यक बुनियादी ढाँचा, नीतियों में सुधार और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना प्राथमिकता होगी। पहले दिन नॉर्वे में आयोजित दो‑पक्षीय मीटिंग में दोनों देशों ने जलवायु‑अनुकूल ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी को सुदृढ़ करने की पुष्टि की। भारत में चल रहे हाइड्रोजन, सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए नॉरडिक विशेषज्ञों की तकनीकी सहायता ली जाएगी, जबकि नॉर्वे को भारत के बड़े बुनियादी ढाँचे के निर्माण में निवेश का अवसर मिलेगा। व्यापार मंच पर भारतीय निर्यातकों को नॉरडिक बाजार में आसान प्रवेश के लिये मानकीकृत प्रक्रिया, कस्टम्स आसानियों और निवेश प्रोत्साहनों की प्रस्तुति भी दी गई। इस दौरान भारतीय स्टार्ट‑अप्स, विशेषकर डिजिटल और फिनटेक क्षेत्रों में, को नॉरडिक वेंचर कैपिटल फंडों से फंडिंग की सम्भावनाओं पर भी चर्चा हुई। व्यापार और ऊर्जा के बाद वैश्विक सुरक्षा और संघर्ष के मुद्दों को एजेंडा में रखा गया। मॉस्को‑यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में तनाव और एशिया‑प्रशांत में बढ़ते युद्धायुक्त प्रतिद्वंद्विता को लेकर दोनों पक्षों ने एक सामरिक संवाद स्थापित किया। मोदी ने बताया कि भारत शांति निर्माण, मानवता सहायता और अंतरराष्ट्रीय कानून के संरक्षण में एक विश्वसनीय भागीदार है, और इस दिशा में नॉरडिक देशों के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र मंच पर अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा रखता है। दूसरे दिन स्वीडन में आयोजित बैंकर और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ संवाद में नई तकनीकी, इलेक्ट्रिक वाहन और डिजिटल स्वास्थ्य क्षेत्रों के सहयोग को बढ़ावा देने की योजना पर बात हुई। दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिये द्विपक्षीय व्यापार समझौते को पुनः देख कर नई शर्तें जोड़ने का प्रस्ताव रखा। यह यात्रा भारत के विदेश नीति में ‘बहुस्तरीय सहयोग’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नॉरडिक देशों के साथ इन व्यापक चर्चाओं से आगे चलकर भारत को ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी उन्नति और वैश्विक स्थिरता के क्षेत्रों में ठोस लाभ मिलने की उम्मीद है। दोनों पक्षों ने यह भी संकेत दिया कि आगामी महीनों में कई संयुक्त परियोजनाओं की शुरुआत होगी, जिससे न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ भी प्राप्त होंगे। इस प्रकार, प्रधानमंत्री मोदी की नॉरडिक यात्रा ने भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती भागीदारी और व्यापक रणनीतिक सहयोग को स्पष्ट रूप से उजागर किया।