नोएडा में हाल ही में घटित एक त्रासदी ने समाज को दहेज प्रथा के खतरों की एक और चौंका देने वाली झलक दिखा दी है। २२ वर्षीया नवविवाहित महिला, जो केवल नौ महीने की शादी के बाद ही अपने घर से बाहर फेंकी गई, को अपने पति की माँ और ससुराल वाले परिवार ने मोटर वाहनों पर अत्यधिक लालसा के कारण लगातार परेशान किया। महिला के परिवार का कहना है कि वह सिर्फ एक फोर्टुनेर एसयूवी की माँग कर रही थी, जिसकी कीमत लाखों में होती है, और जब यह माँग पूरी नहीं हुई तो उसे शारीरिक रूप से पीटा गया और घर की बालकनी से फेंक कर मार डाला गया। यह घटना केवल एक घरेलू झगड़े से आगे बढ़कर दहेज के अत्याचार की एक कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। घटना की सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस ने कई गवाहों और परिवार के सदस्यों से बयान लिया। उनके अनुसार, शादी के बाद ही ससुराल वाले महिलाओं ने महंगे वाहन और नगद दहेज की माँग की, जबकि जितना दहेज तय हुआ था, वह आधा ही दिया गया था। महिला ने इस अनुचित व्यवहार को लेकर कई बार शिकायत दर्ज करवाई, पर उसे घर से बाहर निकाल दिया गया और बालकनी से गिराने की धमकी दी गई। अंततः जब वह अपने पति से इस अत्याचार के विरुद्ध मदद की आशा कर रही थी, तो उसका पति घर से ही नहीं आया और ससुराल वाले ने उसे बिना किसी कारण के मार गिराया। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले में दो व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया, जिनमें पति भी शामिल है। कोर्ट ने परिवार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया और महिला के निधन की स्थिति को देखते हुए दहेज प्रथा को समाप्त करने की सिफारिश की। इस हादसे ने कई सामाजिक संगठनों को भी प्रभावित किया, जिन्होंने दहेज के खिलाफ सख्त कानून लागू करने की मांग की। कई महिला संगठन इस घटना को दहेज प्रथा के निरंतर अस्तित्व का एक कटु प्रमाण मानते हुए, सरकार से दहेज के खिलाफ कड़ी सजा दिलाने का आग्रह कर रहे हैं। इस दुखद घटना से यह स्पष्ट होता है कि दहेज की लालसा ने न केवल महिलाओं की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है, बल्कि पारिवारिक बंधनों को भी टूटने का कारण बना है। समाज को यह समझना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति को उसकी आर्थिक स्थिति या वस्तुओं की इच्छा के कारण मारना या पीटना कभी भी उचित नहीं है। दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए कानून को सख्त बनाना, जागरूकता कार्यक्रम चलाना और पीड़ितों को समर्थन देना आवश्यक है।