नोएडा की 24 वर्षीया MBA ग्रेजुएट ट्विशा शर्मा के पिता ने टुंकारा के एक पति के घर में मिली उनकी मृत शरीर को देखकर भयावह वास्तविकता का पर्दाफाश किया। ट्विशा की शादी एक प्रसिद्ध जज के बेटे से हुई थी, फिर भी दहेज की मांग और वित्तीय दबाव ने उनके जीवन को बरोबर कर दिया। इस दुखद मामले में उनके आखिरी मैसेजों ने न्याय की पुकार को और तीव्र बना दिया है। ट्विशा द्वारा अपने पति को भेजे गए आखिरी संदेशों में बहुत ही भयभीत स्वर में लिखा था, "मैं फंसी हुई हूँ, ब्रो, तू मत..."। इन शब्दों से पता चलता है कि वह अपने पति के घर में अत्याचार एवं दहेज की माँगों से बच नहीं पा रही थी। इस के अलावा उनकी माँ के साथ हुई चैट में उन्होंने अपने भविष्य के बारे में भय, तनाव और दहेज की मांग के कारण उत्पन्न होने वाले शारीरिक-मानसिक आघात के बारे में खुलकर बताया। ट्विशा ने बताया कि उसके सास-ससुर के साथ झगड़े, दहेज के भुगतान में असुविधा और लगातार आर्थिक दबाव ने उसके मनोविज्ञान पर गहरा असर डाला था। पुलिस ने जांच में पाया कि ट्विशा को मारने वाली घटना के पीछे दहेज की माँगर ही मुख्य कारण था। परिवार के कुछ सदस्यों ने बताया कि शादी के बाद दहेज की रक़म वापस नहीं मिली और पत्नी पर इसे लेकर लगातार दबाव बना रहा। यह दबाव न केवल आर्थिक था, बल्कि शारीरिक उत्पीड़न और मानसिक उत्पीड़न के रूप में भी दिखा। ट्विशा को अंततः अत्यधिक तनाव और दवाओं के सेवन के कारण अपने घर में मृत पाया गया। उनके परिवार ने तुरंत न्याय मांगते हुए स्थानीय और केंद्रीय स्तर पर आंदोलन शुरू कर दिए। इस मामले में सामाजिक दृष्टिकोण से भी कई सवाल उठे हैं। दहेज प्रथा की बेड़ियों में फँसी कई महिलाएँ अभी भी ऐसे ही अत्याचारों का शिकार बन रही हैं। न्यायालयों और पुलिस को ऐसे मामलों में तेज़ी से कार्यवाही करनी चाहिए। साथ ही, दहेज संबंधी क़ानूनों को कड़ाई से लागू करना और सामाजिक जागरूकता बढ़ाकर इस खतरनाक प्रथा को जड़ से उखाड़ फेंकना आवश्यक है। ट्विशा की कहानी न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि यह पूरे समाज की बुरी परम्पराओं को उजागर करती है। बहुप्रतापी माँ के दर्द और ट्विशा के परिवार की निराशा ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाया है। कई राजनेता, मानवीय संगठनों और नागरिकों ने न्याय की पुकार को समर्थन दिया है। वर्तमान में मामले की पूरी जांच चल रही है, लेकिन इस उम्मीद के साथ कि अंततः अपराधियों को कड़ी सजा मिलेगी और दहेज जैसी बुराई के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को मजबूती मिलेगी। ट्विशा शर्मा का नाम अब दहेज हत्या के विरोध में एक प्रतीक बन चुका है, और उनके अंतिम संदेशों ने सच्ची न्याय के लिए आवाज़ उठाने की प्रेरणा दी है।