नोएडा के एक उपनगरीय इलाके में घटित हुई दहेज हत्या की घटना ने राज्य भर में गंभीर चिंताएँ उठाई हैं। 22 वर्षीय ट्विशा शर्मा, जो अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने की आकांक्षा रखती थी, अपने ही घर में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाई गई। रिपोर्टों के अनुसार, उसकी मृत्यु का सीधा कारण दहेज के लेन‑देन से उत्पन्न तनाव और उसके पति द्वारा लगातार दबाव था। घटना के बाद ट्विशा के रिश्तेदारों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, परंतु एक चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब उनका पति, जिसका नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया, अब भी फरार है। वह कई बार पुलिस द्वारा जारी वारंटों के बावजूद कहीं से भी सामने नहीं आया और वर्तमान में पुलिस द्वारा हिरासत में है। इस बीच, ट्विशा के पिता, भाई और अन्य निकट संबंधी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आधिकारिक निवास के सामने जलस रही प्रार्थना सभा और रैली का आयोजन कर रहे हैं ताकि इस काली घटना पर न्याय शीघ्रता से सुनिश्चित किया जा सके। त्विशा के अंतिम संदेशों ने इस दर्दनाक कहानी को और गहरा बना दिया है। उनके मोबाइल से निकाले गए चैट रिकॉर्ड और इंस्टाग्राम स्टेटस में वह "मैं फँसी हूँ, मदद करो" जैसी पुकारें थीं, जो उनके दर्द और असहायता का स्पष्ट संकेत देती हैं। कई स्रोतों के अनुसार, ट्विशा को बार‑बार दहेज की मांग के तहत उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, और उसके परिवार को भी आर्थिक व सामाजिक तनाव झेलना पड़ा। इस मुद्दे पर निकटतम न्यायालय ने मामले को त्वरित सुनवाई के लिये निर्देशित किया है, जिससे इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया तेज़ हो सके। इस घटना के सामाजिक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दहेज प्रथा भारत में अभी भी कई क्षेत्रों में जड़ें जमा चुकी है और अक्सर महिलाओं के खिलाफ हिंसा का कारण बनती है। नोएडा में हुई इस मौत का मामला इस बुरे प्रथा को समाप्त करने के लिए एक चेतावनी के रूप में कार्य करना चाहिए। सामाजिक संगठनों और महिलाओं के अधिकार समूहों ने दहेज समाप्ति के लिए कड़े कानूनों और उनके कठोर कार्यान्वयन की मांग की है, साथ ही ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया गया है। निष्कर्षतः, ट्विशा शर्मा की त्रासदी ने न केवल उनके परिवार को, बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। पति के फरार रहने और न्याय के विलंब से यह स्पष्ट है कि कानूनी प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाकर दहेज‑संबंधी अपराधों के लिये कड़ी सजा देना आवश्यक है। इस मामले में शीघ्र ही न्याय मिलना न केवल पीड़ितों के परिवार को सांत्वना देगा, बल्कि दहेज हत्या जैसी भयावह प्रथा को जड़ से समाप्त करने में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित होगा।