प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी मर्स्क के सीईओ सर्गेई निल्सन के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में भारत के बंदरगाह बुनियादी ढांचे के भविष्य को लेकर गहन चर्चा की। यह मुलाकात नई दिल्ली के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) के परिसर में हुई, जहाँ दोनों पक्ष ने भारतीय समुद्री लॉजिस्टिक्स को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आवश्यक कदमों का आकलन किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के निर्यात‑आधारित उद्योगों को तेज़, सुरक्षित और किफायती समुद्री परिवहन की आवश्यकता है, और इस दिशा में बंदरगाह की क्षमता, क्षमताओं और तकनीक को अपडेट करना अनिवार्य है। मर्स्क के प्रतिनिधि ने भारतीय बाजार में अपनी सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के लिये निवेश करने की इच्छा जताई और सहयोग के नए आयाम खोलने की बात की। बैठक में प्रमुख बिंदु के रूप में भारत के प्रमुख पोर्ट्स, जैसे कि शिपरिंग पोर्ट नवी मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में टर्मिनलों का आधुनिकीकरण, डिजिटलाइजेशन और स्वचालन को तेज़ करना शामिल था। दोनों पक्ष ने एआई‑आधारित कंटेनर ट्रैकिंग, ब्लॉकचेन आधारित डाक्यूमेंटेशन तथा ग्रीन पोर्ट पहल को बढ़ावा देने की योजना बनाई। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से हरी ऊर्जा का उपयोग, इलेक्ट्रिक फुहरियों की तैनाती और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिये सस्टेनेबल टेक्नॉलॉजी को लागू करने पर जोर दिया, जबकि मर्स्क ने अपने पर्यावरण मित्र जहाजों और ईंधन दक्षता कार्यक्रमों को भारतीय बंदरगाहों में शामिल करने का प्रस्ताव रखा। कुशल इंफ़्रास्ट्रक्चर पर चर्चा के साथ ही व्यापार सुविधा को बढ़ाने के लिये कस्टम्स प्रक्रियाओं में डिजिटलाइजेशन, एकीकृत पोर्ट समुदाय प्लेटफ़ॉर्म और अनुबंधित शिपिंग लाइनों के माध्यम से समय बचत के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। मोदी सरकार की "अंतिम चरण" की पहल को देखते हुए, दोनों पक्ष ने भविष्य में संयुक्त निवेश, तकनीकी साझेदारी और क्षमतावर्धन कार्यक्रमों के लिए एक रोडमैप तैयार करने का संकल्प लिया। इस बैठक से आशा की जा रही है कि भारत के पोर्ट्स की लोडिंग‑अनलोडिंग समय में कमी आएगी, जिससे निर्यातकों को लाभ होगा और देश की आर्थिक विकास गति और तेज़ होगी। बैठक के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने मर्स्क को भारत के प्रमुख पोर्ट्स में निवेश करने के लिये आकर्षक नीतियों एवं प्रोत्साहनों की गारंटी दी तथा भारतीय नौवहन सेवा को विश्व स्तर पर मान्यता दिलाने के लिये अंतर्राष्ट्रीय मानकों को अपनाने की बात दोहराई। सर्गेई निल्सन ने भारत के समुद्री उद्योग में अपने अनुभव और विशेषज्ञता को साझा करने का वचन दिया, साथ ही भारत में मर्स्क की मौजूदा सेवाओं को विस्तार करने के लिये नई शिपिंग लाइनों और कनेक्टिविटी को मजबूत करने का इरादा जताया। इस संवाद से यह स्पष्ट हुआ कि भारत की समुद्री कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिये निजी‑सार्वजनिक साझेदारी, नवीनतम तकनीकों और पर्यावरणीय सततता को मिलाकर एक समग्र ढांचा तैयार किया जाएगा, जो देश के आर्थिक भविष्य को नई दिशा देगा।