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Breaking News: कोलकाता के पार्क सर्कस में विध्वंस विरोधी प्रदर्शनी में हिंसा, तीन पुलिसकर्मी घायल
🕒 3 days ago

कोलकाता के व्यस्त पार्क सर्कस इलाके में एक अधिनियमित विध्वंस अभियान के विरोध में जुटे निवासियों और पुलिस के बीच झड़प छिड़ गई, जिसके परिणामस्वरूप तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। यह घटना उस समय घटी जब नगर निगम ने कई इमारतों को बेमकसद बनाकर तोड़ने का प्रस्ताव निकाला था, जिससे स्थानीय लोगों में गहरी असहगति पलाई। प्रारम्भ में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रूप से चल रहा था, लेकिन जब अधिकारियों ने बल प्रयोग की चेतावनी दी, तो माहौल बिगड़ गया और भीड़ ने चिल्लाते हुए विध्वंस मशीनों को रोकने की कोशिश की, जिससे नाकाबंदियों और धक्कों का आदान-प्रदान हुआ। प्रदर्शकों ने कहा कि इन इमारतों को तोड़ने से न केवल उनके रहने का साधन खतरे में पड़ेगा, बल्कि स्थानीय व्यापार और सामाजिक संरचना को भी बड़ा नुकसान होगा। उन्होंने नगर निगम के इस कदम को अचानक और बिना उचित परामर्श के लिया गया एक कदम बताया। वहीं पुलिस ने कहा कि विध्वंस काम को रोकने के लिए कई बार संवाद किया गया, परन्तु प्रदर्शनकारियों ने निर्देशों का उल्लंघन किया और अनधिकृत रूप से स्थल पर कब्जा किया। इससे पुलिस को जनता को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके दौरान दो पुलिसकर्मी गिट्टे में घायल हुए और एक को गंभीर चोटें आईं। इस मामले में स्थानीय प्रशासन ने तुरंत स्थिति को शांत करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया और हिंसा को रोकने हेतु कड़ाई से कार्य करने की घोषणा की। कई पत्रकारों ने बताया कि इस झड़प में कई नागरिक भी चोटिल हुए और कुछ को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके अलावा, कई लोगों को अपहरण और वस्तुओं की चोरी की शिकायत भी दर्ज की गई। पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के बाद कई प्रदर्शकों को गिरफ्तार किया और उन्हें न्यायिक कार्रवाई के तहत पेश किया। इस हिंसक घटना ने कोलकाता के नागरिकों में भय और असंतोष को बढ़ा दिया है, जबकि नगर निगम को भी अपने योजनाओं को दोबारा विचार करने का दबाव महसूस हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी विकास कार्यों में सामाजिक सहमति और पारदर्शी संवाद आवश्यक है, ताकि ऐसे निराशा से उत्पन्न होने वाले संघर्षों से बचा जा सके। कई सामाजिक संस्थाओं ने इस मौके पर नागरिकों को शांत रहने और कानून के दायरे में रहकर समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की है। अंत में कहा जा सकता है कि इस संघर्ष ने शहरी विकास और जनता के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को और अधिक उभारा है। यदि भविष्य में ऐसी ही स्थितियों से बचना है तो प्रशासन को पहले से ही पारस्परिक संवाद स्थापित कर, जनहित को प्रमुखता देते हुए कार्यवाही करनी चाहिए। यह घटना यह दर्शाती है कि बिना संवाद के किसी भी विकास कार्य को थोपने से सामाजिक बेमेल और हिंसा को जन्म मिल सकता है, जो अंत में सभी के लिये हानिकारक सिद्ध होता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 17 May 2026