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Breaking News: अबू धाबी के बाराखा एटीपी पर ड्रोन हमले से लगी भारी अग्निकांड
🕒 3 days ago

अभी कुछ घंटों पहले संयुक्त अरब अमीरात के बाराखा परमाणु ऊर्जा केंद्र के बाहरी प्रांगण में एक ड्रोन से हुआ प्रहार गंभीर आपदा को जन्म दिया। नागरिक और सुरक्षा प्राधिकरणों ने बताया कि असामान्य रूप से बड़े आकार के ड्रोन ने उपकरणों की सुरक्षा बाड़ के पास से उड़ान भरी और केंद्र के ठंडा करने के सिस्टम के एक हिस्से को निशाना बनाया। इससे तुरंत बड़े पैमाने पर आग लग गई, जिससे अति गर्मी उत्पन्न हुई और आसपास के टरबाइन तक धुंधली धुंध फैल गई। स्थानीय नेटवर्क ने सूचना दी कि आग की लपटें कई सौ मीटर तक फैल गईं, जिससे निकटवर्ती विद्युत स्थापनाओं को बंद करना पड़ा। सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल ही फायर ब्रिगेड को बुलाया और आपातकालीन प्रणालियों को सक्रिय किया। लकीरें, जलाने वाले एंटीफायर रिटार्डर और सुरक्षा टीमों ने मिलकर आग को नियंत्रित करने के लिये कई घंटे काम किया। इस बीच, बाराखा एटीपी के प्रबंधन ने कहा कि मुख्य रिएक्टर को कोई क्षति नहीं हुई और सभी सुरक्षा उपाय सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इस घटना पर संयुक्त अरब अमीरात सरकार ने गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि इस प्रकार की अराजक कृत्य न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को भी प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि प्रारम्भिक जांच में बताया गया है कि ड्रोन का संचालन संभवतः विदेशी तत्वों द्वारा किया गया। इस कारण से, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस हमले की कड़ी निंदा की गई और सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। ड्रोन हमले की व्यापक जांच शुरू हो चुकी है और कई साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले का उद्देश्य एटीपी के संचालन को बाधित करना और विश्व ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा करना हो सकता है। निरंतर निगरानी, उन्नत प्रतिद्वंद्वी प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से इस प्रकार के खतरे से निपटने के उपायों को तेज किया जाएगा। संपूर्ण स्थिति को देखते हुए, सुरक्षा अधिकारी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पुनः ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये सीमा पार निगरानी और ड्रोनों की पहचान प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही, जनता को आश्वस्त किया गया है कि अब तक किसी भी प्रकार की रेडियोधर्मी रिसाव या नाभिकीय दुर्घटना नहीं हुई है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा में कोई गंभीर जोखिम नहीं बना। अंत में, इस घटना ने ऊर्जा सुरक्षा के लिये नई चुनौतियों को उजागर किया है, और भविष्य में इस तरह के हमलों को रोकने के लिये अंतरराष्ट्रीय सहयोग और उच्च तकनीकी उपायों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 17 May 2026