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Breaking News: प्रधानमंत्री मोदी की स्वीडन यात्रा: 2018 के बाद का बड़ा सरहद पार
🕒 1 hour ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गॉथेनबर्ग पहुंचते ही भारत-स्वीडन द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाएंगे। यह उनका स्वीडन में दो दिन का दौरा है, जो 2018 के बाद पहली बार है तथा पाँच देशों की लंबी दौरे का तीसरा चरण है। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टर्सन ने औपचारिक स्वागत किया और दोनों देशों के राजनैतिक, व्यापारिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने के लिये विस्तृत कार्यक्रम निर्धारित किया है। पहले दिन के एजेंडे में स्वीडन के प्रमुख औद्योगिक संस्थानों और स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम की यात्रा, साथ ही नवाचार और सतत ऊर्जा पर केंद्रित दो संयुक्त कार्यशालाओं का आयोजन शामिल है। इन कार्यशालाओं में स्वीडन की हरित प्रौद्योगिकियों और भारत की डिजिटल सेवा क्षमताओं को जोड़कर एक वैश्विक मंच तैयार करने की योजना है। इसके अतिरिक्त, दो देशों के बीच रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु नई समझौते पर चर्चा होगी, जिससे भारत के शांति रखरखाव मिशनों को तकनीकी सहायता मिल सके। व्यापारिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, मोदी सरकार ने स्वीडन के साथ औद्योगिक उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा, एग्रीटेक और स्वास्थ्य तकनीक में नए व्यापार समझौते का प्रस्ताव रखा है। इस पहल के तहत स्वीडन के उच्च तकनीकी फ़र्मों को भारत के बड़े बाजार में प्रवेश की सुविधा प्रदान की जाएगी, जबकि भारतीय कंपनियों को स्वीडन की अनुसंधान सुविधाओं और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का लाभ मिलेगा। व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठकों में यह भी स्पष्ट किया गया कि दोनों पक्ष निर्यात‑आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिये शुल्क घटाने और निवेश सुरक्षा की गारंटी देने हेतु आवाज़ उठाएंगे। दौरे के समापन पर, दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिये सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। स्वीडन ने भारत को स्वच्छ ऊर्जा बुनियादी ढांचा और कार्बन कैप्चर तकनीक में समर्थन करने का प्रस्ताव रखा है, जबकि भारत ने स्वीडन को अपने हरित ऊर्जा योजनाओं में सहयोग करने का प्रस्ताव दिया। इन सभी पहलों से यह स्पष्ट होता है कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य आर्थिक साझेदारी को गहरा करना, तकनीकी आविष्कारों को साझा करना और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना है। अंत में, प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा को भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि स्वीडन के साथ मजबूत सहयोग भारत के विकास मॉडल को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में सहायक होगा। दोनों देशों के नेताओं ने आशा जताई कि द्विपक्षीय सहयोग के इस नए अध्याय से न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय क्षेत्रों में भी प्रगति होगी, जिससे दोनों राष्ट्रों के नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।

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✍️ By Pradeep Yadav | 17 May 2026