राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनसीबी) ने ऑपरेशन रेज़पिल के तहत भारत में 'जिहादी ड्रग' के नाम से मशहूर कैप्टैगन की पहली बड़ी तस्करी को उजागर किया। दिल्ली के नजदीकी इलाके में लगभग २27 किलोग्राम इस अवैध उत्तेजक दवा की जब्ती की गई, जिस पर अनुमानित मूल्य १८२ करोड़ रुपये है। इस ताबा को भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्य समाचार बिंदु बताया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह ड्रग अब भारत की सीमाओं में प्रवेश कर चुका है। कैप्टैगन, जिसका असली नाम फिनाइलिनाइल्डीहाइड्रॉक्सी-एक्टामाइन है, मध्य पूर्व के कई लड़ाकू समूहों द्वारा ‘जिहादी ड्रग’ कहा जाता है। यह शराबी या ड्रग सेवन करने वाले सैनिकों को ऊर्जा, साहस और तीव्र एकाग्रता प्रदान करने के लिये प्रयोग किया जाता है, जिससे उनका युद्ध कौशल बढ़ जाता है। विश्व भर में इस दवा की तस्करी को लेकर चिंताजनक आवाज़ें थीं, परन्तु भारत में ऐसा पहली बार सामने आया, जो साजिशी नेटवर्क और सीमा पार तस्करी के जटिल जाल को उजागर करता है। ताबा के दौरान एनसीबी ने न केवल दवा को बरामद किया, बल्कि कई संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में भी ले लिया। बरामद वस्तुएँ बड़े बक्सों में पैक की हुई थीं और उन्हें हवाई और भूमि मार्गों से भारत में लाने की कोशिश की जा रही थी। जांचकर्ताओं ने कहा कि इस तस्करी के पीछे एक अंतर्राष्ट्रीय कार्टेल जुड़ा हुआ है, जो मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और एशिया के कई हिस्सों से जुड़े सप्लायर्स के माध्यम से इस ड्रग को विश्वभर में वितरित करता है। अधिकारी यह भी संकेत दे रहे हैं कि इस आपूर्ति श्रृंखला में कुछ स्थानीय लीडरशिप और मिलिशिया भी शामिल हो सकते हैं। भारत सरकार ने इस ताबा को बड़े स्तर पर क़दम उठाते हुए, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में वर्गीकृत किया है। गृह मंत्री अमित शाह ने इसे “देश की सुरक्षा के प्रति सीधे खतरा” कहा और कहा कि भविष्य में इसी तरह के मामलों को रोकने के लिये सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को और सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह की तस्करी को रोकने के लिये कस्टम, सीमा द्वार सुरक्षा और इंटेलिजेंस एजेंसियों के बीच तेज़ी से सूचना साझा करने की प्रक्रियाएँ स्थापित की जा रही हैं। अंत में यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि वैश्विक तस्करी के नेटवर्क अब भारत की सीमाओं को भी पार कर चुके हैं और हमारी सुरक्षा एजेंसियों को इस नई चुनौती से निपटने के लिये निरन्तर सतर्क रहना चाहिए। कैप्टैगन जैसी ‘जिहादी ड्रग’ का दुरुपयोग केवल स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी गंभीर खतरा बनाता है। इसलिए, नीति निर्माताओं, टैंडमेन एजेंसियों और आम जनता को मिलकर इस प्रकार की अवैध तस्करी को जड़ पकड़ने के लिये सहयोग करना आवश्यक है।