सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हाल ही में मीडिया की एक रिपोर्ट को लेकर तीखा विरोध प्रकट किया। कई समाचार संगठनों ने उन्हें उन युवाओं की निंदा करते सुना था जो "नकली डिग्री" लेकर पेशे में प्रवेश कर रहे हैं, फिर वह इस बयान को मीडिया द्वारा गलत उद्धृत करने का आरोप लगा रहे हैं। न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनका अभिप्राय केवल उन लोगों की आलोचना करना था जो झूठे दस्तावेज़ लेकर सम्मानित पेशों में कूदते हैं, न कि सभी बेरोजगार युवाओं को। इस कारण से उन्होंने "कोकरोच" शब्द का प्रयोग करके युवाओं को तुलना नहीं किया, बल्कि व्यवस्था में गड़बड़ी को उजागर करने के लिए एक रूपक इस्तेमाल किया था। इस विवाद की जड़ तब और गहरी हो गई जब विभिन्न समाचार पोर्टलों ने उनके वक्तव्य को अलग-अलग अर्थों में प्रस्तुत किया। कुछ ने कहा कि सीजेआई ने युवाओं को "कोकरोच" कहा, जबकि अन्य ने इसे "परजीवी" शब्द के साथ मिलाकर बताया। इससे सार्वजनिक मंच पर ग़लतफहमियाँ पनपने लगीं और कई सामाजिक मंचों पर युवा वर्ग ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाई। न्यायाधीश सूर्यकांत ने बाद में कहा कि उन्हें मीडिया द्वारा अपने शब्दों को तोड़-मरोड़ कर प्रतिबिंबित करने पर गहरा दुःख हुआ और उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका असली उद्देश्य शिक्षा प्रणाली की खामियों को उजागर करना था, जहाँ कई लोग बिना योग्यतानुसार प्रमाणपत्र लेकर नौकरी के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। मुख्य मुद्दा यह है कि कई युवा आज स्नातक होने के बाद भी उपयुक्त पद नहीं पा रहे हैं, और कुछ ने शॉर्टकट अपनाते हुए नकली डिग्री लेकर पेशेवर नौकरी पाने की कोशिश की है। ऐसा करना न केवल न्याय प्रणाली को कमजोर करता है, बल्कि सच्चे मेहनती युवाओं के अधिकारों को भी हनन करता है। सीजेआई ने इस बात को दोहराते हुए कहा कि न्यायपालिका में केवल योग्य और ईमानदार व्यक्ति ही काम करने चाहिए, और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाएँ इस समस्या को हल करने में कड़ी मेहनत नहीं करेंगी, तो यह समस्या और बढ़ेगी। इस पूरी घटना ने यह सवाल उठाया कि क्या मीडिया को अधिक जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग करनी चाहिए। तथ्यात्मक रिपोर्टिंग के बिना, बयान को तोड़-फोड़ कर जनता में ग़लत धारणाएँ बन सकती हैं। न्यायालय के इस मंच पर आवाज़ उठाने वाले मुख्य न्यायाधीश ने इस प्रक्रिया में भाग लेने वाले सभी पक्षों से शीघ्र और सटीक जानकारी देने का आग्रह किया। अंत में उन्होंने यह कहा कि न्याय और सच्चाई के लिए सभी को मिलकर काम करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी गलतफहमियों को रोका जा सके और रोजगार के अवसरों के लिए एक स्वस्थ व निष्पक्ष माहौल तैयार हो सके।