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Breaking News: एनसीबी ने ‘जिहादी ड्रग’ कैप्टैगॉन की पहली बरामदगी: १८२ करोड़ रुपये की तस्करिया का पर्दाफाश
🕒 1 hour ago

राष्ट्रीय जंघा नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने हाल ही में "ऑपरेशन रेज़पिल" के तहत देश में पहली बार जिहादी ड्रग के रूप में मशहूर कैप्टैगॉन की बड़ी तस्करियों को जब्त किया। इस कार्रवाई में लगभग १८२ करोड़ रुपये मूल्य की कैप्टैगॉन की सामग्रियां नज़रबंद की गईं, जिससे इस ड्रग का भारत में प्रवेश अब तक का सबसे बड़ा मामला बन गया। प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रमुख आँकड़े के अनुसार, यह ड्रग मुख्यतः पश्चिम एशिया के क्षेत्रों से लेकर मध्य पूर्व तक की तस्करी नेटवर्क का हिस्सा है, और इसे अक्सर जिहादी संगठनों के वित्तपोषण के माध्यम के रूप में उपयोग किया जाता है। इस सफलता को केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने सराहते हुए कहा, "यह भारत की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक जीत है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ड्रग तस्करी के खिलाफ हमारी लड़ाई में एक नया अध्याय लिख रहा है।" ऑपरेशन रेज़पिल की योजना कई महीनों की गुप्त जासूसी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर आधारित थी। एनसीबी ने विभिन्न सीमा बिंदुओं पर निरंतर निगरानी रखी और अंततः इस बड़े कार्गो को एक कंटेनर जहाज में छिपाकर भारत की तटवर्ती सीमा पर पहुंचने से पहले ही रोक दिया। यह कंटेनर लगभग ५ टन वजन का था, जिसमें तेज़-प्रभावी उत्तेजक पदार्थ कैप्टैगॉन की बड़ी मात्रा समाहित थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दवा का सेवन करने वाले व्यक्ति में अत्यधिक ऊर्जा, जागरूकता और युद्धकालीन शक्ति की भावना बढ़ जाती है, इसलिए इसे जिहादी समूह अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए प्रमुख रूप से इस्तेमाल करते हैं। कैप्टैगॉन के बारे में अब तक कम ही जानकारी उपलब्ध थी, परंतु इस बार के बड़े पैमाने पर जब्ती ने इस ड्रग के प्रसार का सही आकलन करने में मदद की। भारतीय दवा नियंत्रक कार्यालय (एफडीए) ने बताया कि इस प्रकार की तस्करी के पीछे मुख्यतः कच्चे माल की निर्माण प्रक्रिया में उपयोग होने वाले रासायनिक पदार्थ शामिल होते हैं, जो आम तौर पर नियंत्रित क्षेत्रों में मिलते हैं। इसके अलावा, इस ड्रग की तस्करी में शामिल तस्कर बहु-स्तरीय नेटवर्क का उपयोग करते हैं, जिसमें समुद्री, हवाई और सड़क मार्ग शामिल हैं। एनसीबी ने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, विशेषकर यू.एस. ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (डीडीईए) और यूरोपीय पुलिस संगठन (यूरोपॉल) से जानकारी साझा की, जिससे तस्करियों की पहचान और उनकी लॉजिस्टिक साख को तोड़ना संभव हुआ। इस सफल ऑपरेशन ने न केवल भारत की सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ड्रग नियंत्रण में भूमिका को भी उजागर किया। सरकार ने कहा कि भविष्य में इसी तरह के मामलों को रोकने के लिए सीमा नियंत्रण, बौद्धिक संपदा निगरानी और तकनीकी उन्नयन पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, एनसीबी ने नागरिकों को सूचित किया कि कैप्टैगॉन जैसी अवैध दवाओं से जुड़े किसी भी लेन-देन या संदेहास्पद गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस या स्थानीय कार्यालय को देनी चाहिए। निष्कर्षतः, एनसीबी द्वारा कैप्टैगॉन की इस पहली बड़ी बरामदगी ने ड्रग तस्करी के जाल को उधेड़ने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित किया। १८२ करोड़ रुपये की इस बड़ी तस्करी को रोक कर भारत ने न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा को बढ़ावा दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से जिहादी समूहों के वित्तीय संसाधनों को भी कमजोर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि निरंतर निरोधी कदम और जागरूकता अभियानों से ही इस प्रकार की खतरनाक ड्रग सर्कुलेशनों को जड़ से समाप्त किया जा सकेगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 16 May 2026