📰 Kotputli News
Breaking News: ईंधन की कीमत बढ़ने पर ऐप आधारित गिग कार्मिकों ने घोषित किया राष्ट्रीय स्तर पर पांच घंटे का हड़ताल आंदोलन
🕒 1 hour ago

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ते इजाफे ने भारत भर के ऐप-आधारित गिग कार्मिकों को ज्वलंत कर दिया है। ओवरहीटिंग ईंधन कीमतों के कारण न केवल उनकी आय घट रही है, बल्कि उनके काम की मार्जिन भी ख़तरे में पड़ गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए कई प्रमुख प्लेटफ़ॉर्म जैसे स्विगी, ज़ोमैटो, ब्लिंकिट और ज़ेप्टो के कामगारों ने मिलकर एक राष्ट्रीय स्तर की हड़ताल की योजना बनाई है। इस हड़ताल को पाँच घंटे तक चलाने की घोषणा की गई है, जिसमें दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कई अन्य मेट्रो शहरों में गिग कार्मिक अपने सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करेंगे। इस कदम के पीछे का मुख्य कारण ईंधन की कीमतों में जबरन वृद्धि है, जिससे उनके दैनिक संचालन की लागत में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हो रही है। गिग वर्कर्स यूनियन ने अपनी माँगों को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है। वे चाहते हैं कि सरकार ईंधन मूल्य उछाल को नियंत्रित करने के उपाय अपनाए और साथ ही गिग प्लेटफ़ॉर्म कंपनियों को उनके कामगारों के लिए विशेष दूरस्थ यात्रा भत्ता या सहायक निधि प्रदान करने की दिशा में कदम उठाए। साथ ही वे नई मुआवजा योजना की भी मांग कर रहे हैं, जिसके तहत हर डिलीवरी के बाद ईंधन खर्च को सीधे वर्कर के वेतन में जोड़ दिया जाए। यह मांग इसलिए भी उभरी है क्योंकि कई छोटे और मध्यम दर्जे के डिलीवरी कर्मचारी अपने दैनिक कामकाज में उपभोग होने वाले ईंधन की कीमत को अकेले वहन नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनके व्यावसायिक संतुलन में गंभीर बाधा उत्पन्न हो रही है। हड़ताल की घोषणा पर कई साइटों और नगरपालिकाओं ने प्रतिक्रिया जताई है। कई शहरों में डिलीवरी सेवाओं के बंद होने से उपभोक्ताओं को असुविधा का सामना करना पड़ेगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ ऑनलाइन ग्रॉसरी और फार्मास्युटिकल डिलीवरी पर निर्भरता अधिक है। लेकिन गिग कार्मिकों ने कहा है कि यह पाँच घंटे की हड़ताल केवल एक चेतावनी है और यदि सरकार और कंपनियों की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं मिलता, तो वे अधिक समय तक लगातार हड़ताल करने का विकल्प चुन सकते हैं। इस दांव में उन्होंने अपनी आवाज़ को राष्ट्रीय मंच पर उठाया है, यह दर्शाते हुए कि ईंधन की बढ़ती कीमतें अब एक व्यक्तिगत समस्या नहीं रह गई, बल्कि यह पूरे कार्यबल के लिए एक गंभीर आर्थिक संकट बन चुकी है। विभिन्न समाचार स्रोतों के अनुसार, इस हड़ताल के दौरान संभावित आर्थिक प्रभाव को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। डिलीवरी सेवाओं के बंद होने से छोटे व्यापारियों की आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आ सकता है, जिससे उनके राजस्व पर असर पड़ सकता है। साथ ही, उपभोक्ताओं की राहत सामग्री और जरूरी सामान की डिलीवरी में देरी भी संभव है। इसलिए, इस मुद्दे को सुलझाने के लिए सरकार, उपभोक्ता और गिग प्लेटफ़ॉर्म के बीच संवाद स्थापित करना अनिवार्य हो गया है। वर्तमान में सभी पक्ष मिलकर एक सामंजस्यपूर्ण समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि गिग कार्मिकों की आय सुरक्षित रखी जा सके और उपभोक्ताओं को आवश्यक सेवाएँ बिना बाधा के प्रदान की जा सकें।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 16 May 2026