प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में विदेश यात्रा पर नए कर लगाने की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया। देश में कई मीडिया संस्थाओं ने यह सूचित किया था कि सरकार विदेशी यात्रियों पर अतिरिक्त कर या शुल्क लगाकर अतिरिक्त राजस्व जुटाने की योजना बना रही है, परन्तु प्रधानमंत्री ने इस दावे को "बिल्कुल असत्य" कहा। यह टिप्पणी विदेश यात्रा के दौरान तेल की कीमतों में वृद्धि के मद्देनज़र कही गई, जब कई व्यापारियों और यात्रियों को खर्च में बढ़ोतरी से जुड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। मोदी ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई नीति तैयार नहीं की जा रही है और इस प्रकार की खबरें केवल भ्रम और अफवाहों पर आधारित हैं। इस बयान के पीछे मुख्य कारण यह था कि विदेश यात्रा पर अनावश्यक कर लगाकर देश की आर्थिक स्थिति को और अधिक दबाव में नहीं डालना चाहता सरकार। विदेशियों के लिए इस तरह के कर को लागू करने से भारत की यात्रा उद्योग की प्रतिस्पर्धा में गिरावट आ सकती है, जबकि भारत पर्यटन में वैश्विक स्तर पर बढ़ोतरी की दिशा में कार्य कर रहा है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान में सरकार सामाजिक कल्याण, बुनियादी ढांचा विकास और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर अधिकतम ध्यान केंद्रित कर रही है, इसलिए अतिरक्त कर लगाना उचित नहीं होगा। अफ़वाहों के पैमाने को देखते हुए, विभिन्न समाचार एजेंसियों ने इस मुद्दे को ऊर्जा मूल्य वृद्धि के साथ जोड़कर चर्चा की। लेकिन प्रधानमंत्री के स्पष्ट शब्दों ने इस भ्रम को दूर कर दिया। उन्होंने कहा, "कोई कर नहीं, कोई प्रतिबंध नहीं, और कोई राजस्व योजना नहीं बनाई गई है। इस विषय पर किसी भी प्रकार की जानकारी पूरी तरह से झूठी है।" इस प्रकार के स्पष्ट बयानों से यह स्पष्ट हो गया कि सरकार का ध्यान आर्थिक स्थिरता और विकासकारी नीतियों पर है, न कि अनावश्यक कराधान पर। निष्कर्षतः, विदेश यात्रा पर कर लगाने की कोई योजना सरकार की ओर से नहीं है, और प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात को भली-भांति स्पष्ट किया है। यह स्पष्ट करने के बाद नागरिकों और व्यापारियों को राहत मिली है, क्योंकि अब उन्हें यात्रा संबंधी खर्चों में अतिरिक्त बोझ का डर नहीं रहेगा। सरकार का यह स्पष्ट रुख यह दर्शाता है कि वह विकासशील पहलुओं को प्राथमिकता देती है और किसी भी तरह की अनावश्यक आर्थिक बाधा से बचने का प्रयास कर रही है।