📰 Kotputli News
Breaking News: NEET 2026 पेपर रिसाव में उभरा प्रोफ़ेसर पुने का 'राजा' – सीबीआई ने किया बड़ा पकड़
🕒 1 hour ago

राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NEET) 2026 की कागजी बाढ़ को लेकर देश भर में हंगामा मच गया था, जब मेडिकल aspirants को यह पता चला कि उनके परीक्षा प्रश्नपत्र में गंभीर छेड़छाड़ हुई है। इस अनैतिक कांड की जड़ें अब उजागर हो गई हैं, क्योंकि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस बड़े रिंग में प्रमुख भूमिका निभाने वाले एक रसायन विज्ञान के प्रोफ़ेसर, जो पुणे के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में अध्यापन करते थे, को गिरफ्तार कर लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, यह शिक्षक न केवल स्वयं प्रश्नपत्र को लीक करने में संलग्न था, बल्कि उसने एक विस्तृत नेटवर्क भी तैयार किया था, जिसमें कई मध्यस्थ और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे, जो प्रश्नपत्र को विभिन्न प्रवेश केंद्रों तक पहुंचाने का काम करते थे। अभियान के दौरान सीबीआई ने कई फोरेंसिक जांचें और डिजिटल ट्रैकिंग के माध्यम से यह साबित किया कि लीक किए गए प्रश्नपत्रों की प्रतियां इंटरनेट पर शेयर की जा रही थीं, जिससे विद्यार्थियों को अनुचित लाभ मिल रहा था। इस मामले में प्रमुख आरोपी ने अपनी पढ़ाई के दौरान प्राप्त कई वैज्ञानिक शोध पत्रों को भी लैपटॉप और मोबाइल उपकरणों के जरिए रासायनिक सूत्रों और प्रश्नों को बदलने के लिए इस्तेमाल किया। इस तरह की साजिश न केवल परीक्षा की विश्वसनीयता को धूमिल करती है, बल्कि देश के स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य को भी खतरे में डालती है, क्योंकि योग्य डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए भरोसेमंद एंट्रेंस टेस्ट आवश्यक है। पुने के इस प्रोफ़ेसर की गिरफ्तारी के बाद, शिक्षा मंत्रालय ने तुरंत ही घोषणा की कि अब सभी NEET 2026 के प्रश्नपत्रों की वैधता का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा और जो भी छात्र इस लीक में फंसे हैं, उन्हें पुनः परीक्षा देने का अवसर दिया जाएगा। साथ ही, विभिन्न राज्य बोर्डों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल мониторिंग सिस्टम, दो-स्तरीय सुरक्षा चेकपॉइंट और कड़ी सख़्त नियम लागू करने का इरादा जाहिर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घोटाला दोबारा न दोहराने के लिए कागजी परीक्षा के साथ-साथ कंप्यूटर आधारित परीक्षणों में भी उन्नत एन्क्रिप्शन तकनीक अपनाना अनिवार्य हो गया है। अंत में यह कहा जा सकता है कि NEET 2026 के पेपर लीक मामले ने पूरे शिक्षा तंत्र में गहरी छाप छोड़ी है। जबकि सीबीआई ने इस बड़े गिरोह को तोड़ने में सफलता पाई, लेकिन परीक्षा की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए सरकार, एग्जामन्स बॉडी और शैक्षिक संस्थानों को मिलकर दीर्घकालिक उपाय करने होंगे। केवल कड़ी सज़ा ही नहीं, बल्कि सिस्टम की बुनियादी संरचना में सुधार और तकनीकी सुरक्षा को बखूबी लागू करना ही इस तरह के घोटालों को भविष्य में समाप्त करेगा।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 15 May 2026