अमेरिकी राजनीती के सबसे विवादास्पद चेहरों में से एक, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की "अमेरिका एक गिरता हुआ राष्ट्र है" वाली टिप्पणी को पूरी तरह से समर्थन दिया। यह बयान न केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर धूम मचा रहा है, बल्कि ट्रम्प द्वारा यह भी कहा गया कि यह विचार १०० % सही है और इसके पीछे का मुख्य कारण जो बाइडेन प्रशासन की असफलताएँ हैं। इस संदर्भ में ट्रम्प ने शी के मौखिक बयान को अपने ट्विटर पोस्ट में दोहराया और बाइडेन को सीधे निशाना बनाया, जिससे अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। ट्रम्प का यह समर्थन कई कारकों से प्रेरित है। पहले, ट्रम्प ने अमेरिकी आर्थिक गिरावट, सार्वजनिक ऋण और विदेशी नीति में असमानताओं को बाइडेन के नेतृत्व में बढ़ता हुआ बताया। उन्होंने कहा कि बाइडेन के तहत यूएस ने खुद को "गिरते राष्ट्र" की स्थिति में धकेल दिया है, जबकि शी ने इस बात को पहले ही स्पष्ट कर दिया था। दूसरा, चीन‑अमेरिका संबंधों में चल रहे व्यापार युद्ध और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के माहौल में ट्रम्प ने यह संकेत दिया कि शी के साथ दोस्ती को आगे बढ़ाना अमेरिका के हित में है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि चीन के साथ वार्ता में शांति और सहयोग की भावना को बढ़ावा देना बाइडेन की नीतियों से संभावित रूप से अधिक लाभदायक हो सकता है। भारत में इस विकसित स्थिति को लेकर विभिन्न समाचार स्रोतों ने विस्तृत रिपोर्ट दी हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ने विश्लेषण किया कि ट्रम्प के शब्द न केवल बाइडेन प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं, बल्कि अमेरिकी जनता के बीच राष्ट्र भावना को भी झकझोर रहे हैं। एनडीटीवी का रिपोर्टर इस बात पर प्रकाश डालता है कि शी के बयान के बाद ट्रम्प ने सीधे बाइडेन को दोषी ठहराते हुए कहा, "यह एक खुद की नज़र में गिरते राष्ट्र की भविष्यवाणी है, और हमें इसे ठीक करने के लिए कदम उठाने चाहिए।" इंडिया टुडे ने बताया कि इस बहस से दोनों महाशक्तियों के बीच रणनीतिक संतुलन कैसे बदल रहा है, जबकि फाइनेंशियल टाइम्स ने इस पर ज़ोर दिया कि दोनों देशों के बीच इरान नीति को लेकर भी "बहुत ही समान" विचारधारा है, जो इस मौजूदा विवाद में एक नया आयाम जोड़ता है। इन बयानों का वैश्विक स्तर पर प्रभाव स्पष्ट है। ट्रम्प के समर्थन के साथ शी का बयान अब केवल एक बिंदु नहीं रह गया, बल्कि यह एक नई कूटनीति की दिशा दर्शाता है, जहां दोनों राष्ट्र अपने-अपने हितों को पुनः परिभाषित कर रहे हैं। बाइडेन प्रशासन इस चुनौती का सामना कैसे करेगा, यह सवाल अब दुनिया के कई प्रमुख नेताओं के सामने है। निष्कर्षतः, ट्रम्प का शी के "गिरते राष्ट्र" वाले बयान को १०० % सही मानना सिर्फ एक व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि यह अमेरिकी राजनीति में एक नई लहर का संकेत है। यह घटना भविष्य में अमेरिकी विदेश नीति की दिशा, चीन‑अमेरिका संबंधों के संतुलन और अंतरराष्ट्रीय मंच पर शक्ति संरचनाओं को पुनः रूपांतरित कर सकती है। इस बहस के परिणामस्वरूप, बाइडेन को अपनी नीतियों में ठोस सुधार करने पड़ेंगे, अन्यथा वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रासंगिकता खो सकता है।