नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की यात्रा शुरू की, जिससे पाँच राष्ट्रों के दौरे की बुनियाद रखी गई। इस दौरे की शुरुआत प्रधानमंत्री की आधिकारिक मुलाक़ात और कई समझौतों पर हस्ताक्षर से हुई, जो भारत-यूएई संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की संभावना रखती है। पहले ही शाम को मोदी जी ने अबू धाबी में यूएई के महा प्रधान मंत्री शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नह्यान से मुलाक़ात की, जहाँ वे दो प्रमुख ऊर्जा कोररियों पर हस्ताक्षर करने में सफल रहे। समझौते के तहत भारत ने यूएई के साथ रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व (एसपीआर) स्थापित करने का प्रोटोकॉल पर साइन किया, जिससे भविष्य में अस्थिर वैश्विक तेल कीमतों से रक्षा कर सकें। इसके अलावा, लिक्विफ़ाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति हेतु दीर्घकालिक समझौता भी हुआ, जिससे दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार होगा। ऊर्जा क्षेत्रों में इस समझौते के बाद, रक्षा एवं सुरक्षा के क्षेत्र में भी सरस अहम पायदान चढ़ा गया। दोनों देशों ने रक्षा तकनीक, अंतरिक्ष और एयरोस्पेस सहयोग पर कई एग्रीमेंट किए। इस दौरान यूएई के एरिया में प्रधानमंत्री के विमान को फॉक्स-16 लड़ाकू जेटों ने एस्कॉर्ट किया, जो भारत-यूएई रक्षा संबंधों की गहरी साझेदारी को दर्शाता है। मोदी ने कहा कि इस सहयोग से न केवल भारत की रक्षा क्षमता बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी। इन समझौतों के आर्थिक प्रभावों को आंकना आसान नहीं है, परंतु विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा भारत को लगभग पाँच अरब डॉलर का निवेश लाभ दिला सकता है। यूएई का भारतीय बाज़ार में निवेश पहले से ही बढ़ रहा है, और यह नया अनुबंध दो देशों के व्यापार को और अधिक तेज़ी से बढ़ाने का संकेत है। निवेश में प्रमुख क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचा, नवाचार, वैकल्पिक ऊर्जा और डिजिटल तकनीक शामिल हैं, जिससे भारतीय उद्योगों को नई प्रौद्योगिकियों एवं नई नौकरियों का लाभ मिलेगा। दौरे के अंत में प्रधानमंत्री ने यूएई के साथ हुए सभी समझौतों को 'भारत की ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा क्षमताओं और आर्थिक विकास के लिए एक बड़ी जीत' कहा। उन्होंने कहा कि इस तरह के द्विपक्षीय समझौते भारत को विश्व मंच पर एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित करेंगे, जबकि यूएई को भी मध्य‑पूर्व में भारतीय सहयोगी के रूप में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने का अवसर मिलेगा। इस यात्रा से स्पष्ट है कि दक्षिण‑एशिया और मध्य‑पूर्व के बीच रणनीतिक सहयोग नई ऊर्जा, नई तकनीक और नई निवेश प्रवाह के साथ तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है।