ओरेकल ने हाल ही में किए गए बड़े पैमाने पर छंटनी के बाद अपने कैंपस प्लेसमेंट ऑफ़र को फिर से वापस ले लिया है, जिससे देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों—आईआईटी और एनआईटी—के छात्र गहरी चिंता में डाल दिए गए हैं। यह कदम कंपनी की पुनर्रचना नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत इंक्रीमेंटल लागत घटाना और प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो को सुव्यवस्थित करना शामिल है। कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने इस मंच पर कई महीनों तक अपनी पढ़ाई और तैयारी को इस संभावित नौकरी के इर्द-गिर्द घुमाया था, और अचानक यह खबर उनके भविष्य को अनिश्चित बना रही है। ओरेकल की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, पिछले साल की सबसे बड़ी छंटनी के बाद कंपनी ने अपने राजस्व को बढ़ाने और तकनीकी बदलावों के साथ तालमेल बिठाने के लिए पुनर्गठन किया है। इस प्रक्रिया में, व्यक्तिगत कैंपस ऑफ़र को रद्द किया गया है, जिसके पीछे कारण कंपनियों की व्यावसायिक रणनीति में बदलाव और नई तकनीकों पर फोकस है। इस घोषणा को सुनते ही कई छात्रों ने सामाजिक मीडिया पर अपना निराशा व्यक्त किया, कुछ ने तो अपने भविष्य के लिए वैकल्पिक कंपनियों की तलाश शुरू कर दी। आईआईटी और एनआईटी के छात्रों ने इस कदम को अनैतिक बताया, क्योंकि वे कंपनी के साथ कई महीनों से संकल्पित थे और प्लेसमेंट प्रक्रियाओं में भाग लेकर कई बार चयनित हो चुके थे। कुछ छात्र समूहों ने ओरेकल के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की संभावना जताई है, जबकि अन्य ने उद्योग में अन्य अवसरों की तलाश में तेजी लाई है। इस विवाद ने शिक्षा संस्थानों को भी इस तरह की बड़े कंपनियों की भर्ती नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है, जिससे भविष्य में रोजगार की सुरक्षा के लिए छात्रों और संस्थानों के बीच संवाद को सुदृढ़ करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। समाप्ति में कहा जा सकता है कि ओरेकल की यह नई नीति न केवल एक बड़ी कंपनी के व्यावसायिक निर्णय को दर्शाती है, बल्कि भारतीय तकनीकी शिक्षा प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियों को भी उजागर करती है। छात्रों को अब अधिक लचीलापन और बहु-पर्यायी करियर योजना बनानी होगी, जबकि कंपनियों को भी अपने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बनाए रखना आवश्यक है। इस क्षणिक अंधेरे के बाद, आशा है कि छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे और उद्योग में नई संभावनाओं का निर्माण होगा।