नई दिल्ली – राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट) के लगातार विवादों और लीकेज स्कैम के बाद, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्रम सिंह विजय ने केंद्र सरकार को एक अहम पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा कि NEET को समाप्त करके प्रत्येक राज्य को अपने मेडिकल कॉलेजों में सीटों का वितरण 12वीं कक्षा के अंक के आधार पर किया जाना चाहिए। इस मांग का उद्देश्य छात्रों को एक समान अवसर प्रदान करना और परीक्षा संचालन में मौजूद त्रुटियों और भ्रष्टाचार को बंद करना है। मुख्य वजहों में प्रमुख है NEET-UG 2026 में कठोर प्रश्नपत्र, टैलेंट स्कैमर से लेकर कई छात्र परिवारों पर पड़े आर्थिक बोझ तक की श्रृंखला। हिंदुस्तान में कई केस दर्ज हुए हैं जहाँ हाईस्कूल के अंकों के आधार पर ही प्रवेश मिला था, लेकिन NEET के परिणामों ने कई योग्य छात्रों को बाहर कर दिया। विपक्षी दल और कई छात्र संघों ने भी इस मुद्दे पर आवाज उठाई, यह तर्क देते हुए कि 12वीं में ही छात्रों की क्षमता का आकलन पर्याप्त है, जबकि विस्तृत राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में कई तकनीकी glitches और प्रश्नपत्र में त्रुटियों का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री विजय ने पत्र में बताया कि उत्तराखंड के कई ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में विश्वसनीय इंटरनेट सुविधा नहीं है, जिससे छात्रों को ऑनलाइन परीक्षा में बाधा आती है। उन्होंने यह भी कहा कि 12वीं के उत्तरदाताओं की विश्वसनीयता को मान्यता देते हुए, राज्य सरकारें एक सुस्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में आवेदन स्वीकार कर सकती हैं। यह कदम न केवल छात्रों के लिए न्यायसंगत सोर्सिंग सुनिश्चित करेगा, बल्कि राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में स्थानिक प्रतिभा को भी बढ़ावा देगा। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने अभी तक इस प्रस्ताव पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है, परंतु राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने NENE टेस्टिंग प्रोसेस में सुधार की बात कही थी। विभिन्न राज्यों में पहले से ही कुछ ऐसे मॉडल हैं जहाँ 12वीं के अंक के आधार पर मेडिकल प्रवेश दिया जाता है, जैसे कि कुछ दक्षिणी राज्यों में। यदि केंद्र इस पहल को समर्थन देता है तो यह देश भर में एक बड़ी नीति परिवर्तन की ओर इशारा करेगा, जिससे न केवल शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता आएगी, बल्कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता भी स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढलाई जाएगी। अंत में, मुख्यमंत्री विजय का यह कदम यह दर्शाता है कि राज्य स्तर पर शिक्षा नीति को पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। यदि 12वीं कक्षा के अंकों को प्राथमिक मानदंड बनाकर मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया को सरल किया जाए, तो यह छात्रों के मानसिक तनाव को घटाएगा और उन्हें अपने शैक्षिक लक्ष्य की ओर अधिक फोकस करने का अवसर प्रदान करेगा। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को कैसे ग्रहण करती है और क्या भारत में NEET को पूरी तरह से समाप्त कर, प्रत्येक राज्य को अपने मेडिकल सीटों की स्वायत्तता दी जाएगी।