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Breaking News: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इरानी राजनयिक का भारत आगमन: 'मिनाब168' संदेश ने उठाया नया सवाल
🕒 22 hours ago

दिवाली के बाद दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मध्य इरान के विदेश मंत्री अहमेद अरख़ी की अनुपस्थिति नहीं रहे। वह भारत के राजधानियों में इस महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच में भाग लेने आए, लेकिन उनका यात्रा ज्ञात हुआ कि एक रहस्यमयी संदेश लेकर आया: विमानों के साइड में बड़े अक्षरों में लिखा था "मिनाब168"। इस संदेश के पीछे की मंशा और इसका अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में क्या प्रभाव हो सकता है, इस पर विभिन्न विशेषज्ञों ने अपनी-अपनी टिप्पणी दी है। इरान का यह कदम, विशेष रूप से यूएस के प्रति आलोचना के साथ, ब्रिक्स के भीतर सभ्यतापूर्ण संवाद की आवश्यकता को उजागर करता है, जबकि साथ ही इस समूह के भीतर वैर और विभाजन के संकेत भी देता है। ब्रिक्स में इरान का प्रतिनिधित्व करने वाले अरख़ी ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, तेल की कीमतों पर सहयोग और मध्य-पूर्व में बढ़ती तनाव को कम करना है। इस बीच, भारत ने अपना पावरपॉइंट प्रस्तुत किया, जिसमें प्रतिबंधों के खिलाफ कड़ा रुख और हार्मुस जलधारा के मुक्त उपयोग की वकालत की गई। इस मंच पर इरान ने भी यूएस के विरुद्ध कूटनीतिक जाल बुनते हुए कहा कि अमेरिकी एकाधिकारवादी संकल्पना विश्व में अराजकता को बढ़ा रही है। "मिनाब168" संदेश को कई विश्लेषकों ने इरानी प्रवचन में कूटनीतिक संकेत माना है, जिसका अर्थ संभवतः इसडिल के मध्य में स्थित मिनाब शहर से जुड़ा हो सकता है, जहां इरान ने हाल ही में आर्थिक सहयोग बढ़ाने की कोशिश की है। हालांकि, यह सन्देश कुछ देशों में असुविधा का कारण बना। भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने खुले तौर पर कहा कि किसी भी एकतरफ़ा दबाव, प्रतिबंध या आर्थिक जुदाई को अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए हानिकारक माना जाना चाहिए। उन्होंने ब्रिक्स के सदस्यों को ऐसे कदम उठाने से बचने की अपील की, जिससे इस समूह की एकता बिगड़ सकती है। इस दौरान ब्रिक्स के अन्य सदस्यों ने भी इरान के इस पहलू को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी, कुछ ने इसे दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने का एक सकारात्मक कदम माना, जबकि कुछ ने इसे यूएस के विरुद्ध खुली लड़ाई के रूप में देखा। निष्कर्षतः, इरान के विदेश मंत्री का "मिनाब168" संदेश ब्रिक्स के मंच को एक नया राजनीतिक आयाम प्रदान करता है। यह न केवल इरान के मध्य-पूर्व में प्रभाव को दर्शाता है, बल्कि इस समूह के भीतर आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक चुनौतियों को भी उजागर करता है। भारत, चीन, रूस और ब्राज़ील जैसी प्रमुख देशों को अब इस संदेश की वास्तविक मंशा समझते हुए एक संतुलित नीति बनानी होगी, ताकि ब्रिक्स की प्रतिबद्धताओं पर कोई द्विधा न पड़े और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर इस समूह की आवाज़ मजबूत बनी रहे।

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✍️ By Pradeep Yadav | 14 May 2026